देहरादून। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से मंगलवार को नगर निगम देहरादून के जुगमंदर हॉल में “बाल अधिकारों एवं सुरक्षा हेतु संवेदीकरण व जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों, अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों को बाल अधिकारों, सुरक्षा और बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में डालसा के चीफ डिफेंस काउंसिल अजय कुमार बडोनी, पुलिस विभाग के साइबर सेल से गिरीश चंद्र शर्मा, शिक्षा विभाग से सतीश चंद्र नौटियाल, परिवहन विभाग से अनिता चमोला, श्रम विभाग के सहायक श्रम आयुक्त शैलेश सती तथा नगर निगम देहरादून के नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, नैतिक मूल्यों और अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए परिवार, समाज और संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की डॉ. गीता खन्ना ने बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बाल अधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन सामूहिक जिम्मेदारी है। वहीं आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने आयोग की भूमिका, बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़े मामलों में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यशाला में भारतीय न्याय संहिता में बच्चों से संबंधित प्रावधान, पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम, साइबर सुरक्षा एवं आईटी एक्ट-2000, बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उससे बचाव, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, सड़क सुरक्षा एवं परिवहन तथा बाल श्रम जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के समापन पर आयोग के अनुसचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के माध्यम से बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बाल सुरक्षा और अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने का संदेश दिया गया।
