श्रीनगर। चौरास क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई पेयजल पंपिंग योजना के बावजूद लोगों को साफ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जाखणी और मढ़ी चौरास क्षेत्र में लंबे समय से नलों में मटमैला और दूषित पानी आने की शिकायत सामने आ रही है। पानी की स्थिति को लेकर स्थानीय उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल पंपिंग योजना तैयार की गई है, तो इसके बावजूद उन्हें पीने के लिए साफ पानी क्यों नहीं मिल रहा, यह गंभीर सवाल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार घरों में पहुंचने वाला पानी इतना मटमैला होता है कि उसे सीधे पीने के लिए इस्तेमाल करना संभव नहीं है। पानी में गंदगी दिखाई देने के कारण लोग इसे पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल करने से बच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल योजना का उद्देश्य लोगों को शहरी मानकों के अनुरूप स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में योजना के अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
स्थानीय निवासी विनोद चमोली ने बताया कि क्षेत्र में विगत लंबे समय से मटमैले पानी की आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। नलों में साफ पानी आने के बजाय गंदा पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना है कि पानी की गुणवत्ता को लेकर विभाग को गंभीरता से जांच करनी चाहिए, क्योंकि दूषित पानी का लगातार सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति से पहले पानी को पर्याप्त तरीके से फिल्टर किए जाने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर योजना तैयार की गई है तो पानी को निर्धारित मानकों के अनुरूप साफ करने और उसके बाद ही उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई पेयजल पंपिंग योजना से जाखणी और मढ़ी चौरास क्षेत्र के लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद थी। योजना का उद्देश्य क्षेत्र की आबादी को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार योजना संचालित होने के बावजूद यदि नलों से मटमैला पानी पहुंच रहा है तो इसकी गुणवत्ता और संचालन व्यवस्था की जांच आवश्यक हो जाती है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। साथ ही जलस्रोत से लेकर पाइपलाइन और फिल्टर व्यवस्था तक का निरीक्षण किया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी दूषित होने की समस्या आखिर कहां से उत्पन्न हो रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित पेयजल विभाग से तत्काल प्रभाव से पानी की गुणवत्ता की जांच कराने, फिल्टर व्यवस्था को दुरुस्त करने और उपभोक्ताओं को नियमित रूप से साफ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजना का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब घरों तक सुरक्षित और स्वच्छ पानी पहुंचे। दूषित पानी की शिकायतों को केवल अस्थायी तौर पर दूर करने के बजाय इसके स्थायी समाधान की जरूरत है।
