अनुराग गुप्ता
देहरादून।
कोटड़ा कल्याणपुर क्षेत्र में जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में काटकर बेचने का खेल चलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि जिस प्लॉटिंग को लेकर लोगों को जमीन बेचने की कवायद की जा रही है, उसके लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) से आवश्यक स्वीकृति और ले-आउट मानचित्र की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ जमीन की रजिस्ट्री हो जाना ही किसी प्लॉट को सुरक्षित और निर्माण योग्य बना देता है? जवाब है—जरूरी नहीं।


MDDA ने खुद सार्वजनिक सूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन खरीदने से पहले खरीदार को यह जांचना चाहिए कि संबंधित भूखंड स्वीकृत ले-आउट/तलपट मानचित्र का हिस्सा है या नहीं। MDDA ने बिना स्वीकृति की जा रही अवैध प्लॉटिंग में भूखंड खरीदने से साफ तौर पर बचने की सलाह दी है।
जेब से लाखों निकलेंगे, लेकिन घर बन पाएगा या नहीं—कौन देगा जवाब?
अवैध या बिना स्वीकृत ले-आउट वाली प्लॉटिंग में सबसे बड़ा खतरा उस व्यक्ति के सामने खड़ा होता है जो अपनी जिंदगी की जमा पूंजी लगाकर जमीन खरीदता है और बाद में उस पर घर बनाने पहुंचता है।
MDDA की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक, अवैध प्लॉटिंग पर खरीदे गए भूखंड पर प्राधिकरण द्वारा भवन मानचित्र स्वीकृत नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, यदि ऐसी प्लॉटिंग के खिलाफ सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो इसकी जिम्मेदारी खरीदार की हो सकती है।
यानी जमीन खरीदते वक्त अगर विक्रेता सिर्फ यह कहकर ग्राहक को भरोसा दिला दे कि “रजिस्ट्री हो जाएगी, बाकी सब हम देख लेंगे”, तो खरीदार के लिए बाद में यही भरोसा भारी पड़ सकता है।
बिना MDDA स्वीकृति के निर्माण किया तो क्या हो सकता है?
निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण की अनुमति और स्वीकृत नक्शे की जरूरत होती है। MDDA की गाइडलाइन में भवन निर्माण/विकास से जुड़े मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज निर्धारित हैं।
बिना आवश्यक स्वीकृति के निर्माण करने पर स्थिति अनधिकृत निर्माण की श्रेणी में जा सकती है और प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई का खतरा रहता है। MDDA की वेबसाइट पर अनधिकृत निर्माणों की सीलिंग और ध्वस्तीकरण से संबंधित कार्रवाई के मामले भी प्रकाशित किए जाते हैं।
ऐसे में खरीदार को कई स्तर पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है—
– घर का नक्शा स्वीकृत कराने में दिक्कत।
– निर्माण पर प्राधिकरण की कार्रवाई का जोखिम।
– प्लॉटिंग ही अवैध पाए जाने पर भूखंड की स्थिति विवादित होना।
– भविष्य में जमीन बेचने में परेशानी।
– खरीदार की जमा पूंजी लंबे समय तक फंस सकती है।
– सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य विकास सुविधाओं को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है।
– सबसे बड़ा सवाल—जिस जमीन पर घर बनाने का सपना लेकर पैसा लगाया, वहां कानूनी रूप से निर्माण की अनुमति मिलेगी भी या नहीं?
सिर्फ रजिस्ट्री देखकर जमीन खरीदना समझदारी नहीं
MDDA की सार्वजनिक सूचना में खरीदारों को जमीन खरीदने से पहले भू-उपयोग, स्वीकृत ले-आउट, मानचित्र संख्या और संबंधित भूखंड की स्वीकृति का सत्यापन कराने की सलाह दी गई है। साथ ही राजस्व अभिलेखों में जमीन के स्वामित्व, खसरा नंबर, विवाद और सरकारी भूमि शामिल होने जैसी बातों की भी जांच कराने को कहा गया है।
यानी ग्राहक के लिए केवल यह देखना काफी नहीं कि “रजिस्ट्री हो रही है या नहीं।” उसे यह भी देखना होगा कि जिस जमीन पर वह लाखों रुपये लगा रहा है, वह कानूनी रूप से प्लॉटिंग योग्य है या नहीं और भविष्य में उस पर निर्माण की अनुमति मिल सकती है या नहीं।
अब सवाल MDDA और जिम्मेदार विभाग से
कोटड़ा कल्याणपुर में यदि वास्तव में बिना MDDA स्वीकृति के प्लॉटिंग की जा रही है, तो सवाल यह है कि प्लॉटिंग शुरू होने से पहले विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?
क्या मौके पर ले-आउट की जांच हुई?
क्या भू-उपयोग की स्थिति देखी गई?
क्या प्लॉट काटने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां ली गईं?
और अगर स्वीकृति नहीं है तो लोगों को जमीन बेचने का यह सिलसिला आखिर कैसे चल रहा है?
यह मामला सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त का नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी भर की कमाई से जुड़ा है जो अपने लिए एक छोटा सा आशियाना बनाने का सपना देखते हैं।
अब देखना होगा कि कोटड़ा कल्याणपुर में कथित अवैध प्लॉटिंग के मामले में MDDA कब मौके की जांच करता है और अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
खरीदारों के लिए सीधी सलाह: किसी भी ऐसे प्लॉट को खरीदने से पहले MDDA से उसके स्वीकृत ले-आउट/मानचित्र, भू-उपयोग और निर्माण की स्थिति का स्वतंत्र रूप से सत्यापन जरूर कराएं। MDDA भी अवैध प्लॉटिंग में भूखंड खरीदने से बचने की सलाह देता है।वेबसाइट के लिए एक तीखी हेडलाइन का विकल्प:
“कोटड़ा कल्याणपुर में प्लॉटिंग का खेल! MDDA की अनुमति के बिना जमीन बेचने का आरोप, कहीं खरीदारों के सपनों का आशियाना न बन जाए मुसीबत”
