देहरादून/नई दिल्ली, 28 जुलाई। हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के विपणन से जुड़े प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तराखंड सहित पर्वतीय राज्यों के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों और उपलब्धियों की जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से पर्वतीय राज्यों में कृषि, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में इन राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही तकनीकी सहयोग और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न पर्वतीय राज्यों में एनसीडीसी के नए कार्यालय भी स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल), कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) तथा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से पर्वतीय राज्यों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है।
श्री शाह ने बताया कि उत्तराखंड के किसानों को अब तक 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं एनसीओएल द्वारा राज्य के किसानों से 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूं, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स का प्रापण किया गया है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड सहकारिता के क्षेत्र में देश के सभी पर्वतीय राज्यों में अग्रणी बनकर उभरा है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पर्वतीय राज्यों को एनसीडीसी द्वारा प्रदान की गई ₹422.95 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़, अर्थात लगभग 68 प्रतिशत राशि, अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुई है, जो सभी पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक है।
रावत ने बताया कि उत्तराखंड बीबीएसएसएल, एनसीईएल और एनसीओएल तीनों राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की सदस्यता के मामले में भी पहले स्थान पर है। राज्य की 551 सहकारी समितियां बीबीएसएसएल, 487 समितियां एनसीईएल तथा 387 समितियां एनसीओएल की सदस्य हैं, जो पर्वतीय राज्यों में सबसे अधिक हैं। उन्होंने बताया कि एनसीईएल की कुल सदस्य समितियों में लगभग 56 प्रतिशत तथा एनसीओएल की लगभग 54 प्रतिशत सदस्य समितियां अकेले उत्तराखंड की हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कृषि, बागवानी एवं जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।
त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “सहकारिता से समृद्धि” का संकल्प उत्तराखंड में तेजी से साकार हो रहा है और आने वाले समय में राज्य देश के लिए सहकारिता का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
