देहरादून। उत्तराखंड की एकमात्र रामसर साइट आसन कंजर्वेशन रिजर्व (आसन वेटलैंड) के बफर जोन में अवैध खनन और स्टोन क्रशरों के संचालन को लेकर मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में भेजी गई 35 पन्नों की शिकायत और सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ने पूरे प्रकरण को राष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा किया है।
सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आसन कंजर्वेशन रिजर्व के बफर जोन में 43 माइनिंग लीज और 26 स्टोन क्रशर संचालित हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ खनन गतिविधियां उत्तराखंड की सीमा तक पहुंचने के आरोपों के घेरे में हैं। इस बीच हिमाचल हाईकोर्ट ने 10 किलोमीटर दायरे में वन्यजीव और पर्यावरण संबंधी आवश्यक अनुमतियों के बिना संचालित खनन पर कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।
देहरादून स्थित एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि भारी मशीनों से हो रहे खनन, ध्वनि प्रदूषण और नदी तल के क्षरण से रामसर साइट की पारिस्थितिकी तथा प्रवासी पक्षियों के आवास पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। शिकायत में उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।
इधर, स्थानीय स्तर पर भी यमुना नदी में बड़े पैमाने पर खनन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का आरोप है कि हाल के महीनों में नदी में बड़ी संख्या में मशीनों से खनन हो रहा था और स्टोन क्रशरों में भारी मात्रा में खनन सामग्री जमा की जा रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित जिला खान अधिकारी या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
अब जब हाईकोर्ट की निगरानी और पीएमओ तक शिकायत पहुंच चुकी है, तो निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अवैध खनन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाता है।
आसन वेटलैंड पर खनन का हमला, हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी कार्रवाई नहीं
रामसर साइट खतरे में! अवैध खनन और स्टोन क्रशरों पर शिकंजा कब?
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