देहरादून, 28 जुलाई। कुलाधिपति एवं राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंगलवार को लोक भवन में प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालयों को छात्र-केंद्रित, गुणवत्तापूर्ण एवं भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, आत्मविश्वासी और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं का निर्माण करना होना चाहिए, जो रोजगार, उद्यमिता और 21वीं सदी की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
बैठक में राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, चुनौतियों, शोध एवं अनुसंधान गतिविधियों तथा रिक्त पदों की भर्ती की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कुलपतियों से कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को उद्योग और बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना विश्वविद्यालयों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों की नैतिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए सकारात्मक एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ परिसर संस्कृति विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर जोर देते हुए राज्यपाल ने आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर सुदृढ़ जांच और पुनः जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि परीक्षा प्रणाली त्रुटिरहित और भरोसेमंद बन सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके भवनों से नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार और उपलब्धियों से होती है। राज्यपाल ने एनआईआरएफ और एनएएसी रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए शोध, पेटेंट, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना और अकादमिक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुरूप निष्पक्षता के साथ संपन्न हों। उन्होंने कुलपतियों से नई शिक्षा नीति, नई तकनीक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों को विकसित करने के लिए दूरदृष्टि के साथ कार्य करने का आग्रह किया।
बैठक में सभी कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, चल रहे शैक्षणिक एवं शोध कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी प्रस्तुत की।
