Hamarichoupal,15,06,2026
Anurag gupta
सेलाकुई। वन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा की सुरक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गश्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बाया खाला क्षेत्र, सेलाकुई में वन विभाग की टीम को गश्त के दौरान एक हरा-भरा गुल्लर का पेड़ अवैध रूप से कटा हुआ मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तत्काल जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच और खोजबीन के दौरान जानकारी मिली कि संबंधित भूमि स्वामी संजय पाल द्वारा एक व्यक्ति को ठेका देकर उक्त पेड़ कटवाया गया था। वन विभाग ने मामले में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पेड़ काटने वाले अभियुक्त तथा भूमि स्वामी के खिलाफ वन अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पूछताछ के दौरान अभियुक्त अब्दुल कादिर, निवासी बल्लूपुर क्षेत्र, ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उक्त पेड़ किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर काटा गया था। वन विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को एकत्रित किया जा रहा है ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
वन अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति हरे पेड़ों की कटाई कानूनन अपराध है। पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, वायु को शुद्ध करने, भूजल संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक परिपक्व पेड़ को काटने से पर्यावरण को दीर्घकालिक क्षति पहुंचती है, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार गुल्लर जैसे वृक्ष अनेक पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए भोजन एवं आश्रय का प्रमुख स्रोत होते हैं। इनके अवैध कटान से जैव विविधता प्रभावित होती है तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण और वन क्षेत्रों में नियमित गश्त जारी रहेगी तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग का संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। पेड़ों की रक्षा करके ही हम स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों को दे सकते हैं।
