विश्व दृष्टि दिवस पर मैक्स अस्पताल ने आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने के लिए समय पर जांच और समन्वित उपचार पर दिया जोर
देहरादून। मधुमेह, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आंखों की सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन बीमारियों के कारण मोतियाबिंद, मधुमेह जनित नेत्र रोग, काला मोतिया और रेटिना संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे समय पर बीमारी की पहचान और उपचार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, देहरादून ने आंखों की नियमित जांच और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए समग्र उपचार के महत्व पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मरीजों के उपचार में केवल आंखों की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इलाज की योजना बनाना भी जरूरी है।
अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. बी. एम. विनोद कुमार ने बताया कि मधुमेह, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियां आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए नियमित जांच और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी, रेटिना की लेजर प्रक्रिया, काला मोतिया का उपचार तथा आंखों से जुड़ी विभिन्न जटिल समस्याओं के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल बंगवाल ने कहा कि एक से अधिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज में उनकी संपूर्ण सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। मधुमेह के मरीजों में रेटिना संबंधी समस्या का उपचार करते समय रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी होता है। वहीं, किडनी और हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को आंखों की किसी प्रक्रिया से पहले संबंधित विशेषज्ञों की सलाह की आवश्यकता हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नेत्र रोग विशेषज्ञों के साथ किडनी, हृदय, हार्मोन संबंधी रोगों और बेहोशी विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल से जटिल मामलों में उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। इससे मरीजों को एक ही अस्पताल में विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह और उपचार की सुविधा भी मिल सकती है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि आंखों में किसी प्रकार की परेशानी होने का इंतजार न करें। विशेष रूप से मधुमेह और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोग नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, ताकि बीमारियों की समय रहते पहचान कर आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने की दिशा में उचित कदम उठाए जा सकें।
लंबे समय से बीमार मरीजों की आंखों की नियमित जांच जरूरी : विशेषज्ञ
2
