Hamarichoupal,17,06,2026
अनुराग गुप्ता
देहरादून, 17 जून। उत्तराखंड को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य घोषित करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव आगामी मंत्रिमंडल बैठक में रखा जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबंधित प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. रावत ने बताया कि केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ (अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को उत्तराखंड ने पूरा कर लिया है। वर्तमान में राज्य की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक है, जो पूर्ण साक्षर राज्य बनने की पात्रता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। इसके पश्चात उत्तराखंड को औपचारिक रूप से ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिल सकेगा।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि उल्लास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, आधारभूत शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। इस अभियान में सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों तथा जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाया गया।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य वंचित वर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई। खासतौर पर उन क्षेत्रों में व्यापक प्रयास किए गए जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी।
डॉ. रावत के अनुसार, देश में अब तक मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। उत्तराखंड भी जल्द इस सूची में शामिल होने जा रहा है।
क्या है ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा?
केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक होने तथा गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा होने पर उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य माना जाता है। उत्तराखंड ने इस मानक को पार करते हुए 98 प्रतिशत से अधिक साक्षरता दर हासिल की है।
