अनुराग गुप्ता
देहरादून में 11वां अंतरराष्ट्रीय एसईएडीएफकॉन आयोजित, कार्डियो-डायबिटिक स्वास्थ्य पर केंद्रित रहा सम्मेलन
देहरादून। दक्षिण एशिया में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह और उससे जुड़ी हृदय संबंधी जटिलताओं को लेकर देहरादून में 11वें अंतरराष्ट्रीय एसईएडीएफकॉन का आयोजन किया गया। साउथ ईस्ट एशिया डायबिटीज फाउंडेशन (एसईएडीएफ) के तत्वावधान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मुख्य थीम ‘कार्डियो-डायबिटिक’ रही। सम्मेलन में मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और कार्डियो-मेटाबोलिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया।

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सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष एवं एसईएडीएफ के संस्थापक डॉ. अमित वर्मा रहे। आयोजन में सह-आयोजक अध्यक्ष डॉ. अभिषेक गुप्ता और डॉ. एस.डी. जोशी, आयोजन सचिव डॉ. अंजलि शर्मा सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण के मार्गदर्शन में आयोजित सम्मेलन में गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं सुभारती अस्पताल के मेडिसिन विभाग के फैकल्टी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राहुल शुक्ला तथा प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशांत कुमार भटनागर सहित अन्य चिकित्सक एवं विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत इको कार्यशाला से हुई। इसमें हृदय की जांच और इकोकार्डियोग्राफी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण एवं चर्चा की। इसके बाद श्रीमती कुंतल वर्मा ओरेशन एवं अवार्ड, उद्घाटन तथा सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
मधुमेह उपचार में आधुनिक तकनीक पर जोर
वैज्ञानिक सत्रों में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, मधुमेह एवं क्षय रोग, आधुनिक मधुमेह तकनीक एवं उपचार तथा टाइप-2 मधुमेह के उपचार में नवीनतम प्रगति सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान हुए। डॉ. सरिता बजाज, डॉ. ज्योतिरमय पॉल, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. कल्पना डैश सहित विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने अनुभव और नवीनतम चिकित्सा जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चर्चा की कि टाइप-2 मधुमेह के उपचार को केवल ब्लड ग्लूकोज नियंत्रण तक सीमित रखने के बजाय मरीज के समग्र कार्डियो-मेटाबोलिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही मोटापे को केवल वजन बढ़ने की समस्या न मानकर एक चिकित्सकीय स्थिति के रूप में देखने, उपचार की दीर्घकालिक प्रभावशीलता, आइलेट कोशिका प्रत्यारोपण, स्टेम सेल थेरेपी और मधुमेह से जुड़ी डिसलिपिडेमिया जैसे विषयों पर भी नवीनतम जानकारी साझा की गई।
चार देशों के विशेषज्ञों की सहभागिता
सम्मेलन में भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से जुड़े विशेषज्ञों एवं पदाधिकारियों ने भी सहभागिता की। इससे सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिला और विभिन्न देशों के चिकित्सकों को मधुमेह एवं हृदय रोगों के उपचार और रोकथाम से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य मधुमेह और हृदय रोगों के बीच गहरे संबंध को समझते हुए आधुनिक रोकथाम, समय पर पहचान, जोखिम मूल्यांकन और समग्र उपचार की दिशा में चिकित्सकों के ज्ञान को मजबूत करना है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने मधुमेह एवं कार्डियो-मेटाबोलिक रोगों की रोकथाम और बेहतर उपचार के लिए आपसी सहयोग तथा निरंतर चिकित्सा शिक्षा को आवश्यक बताया।
