देहरादून। परवल-देवीपुर मार्केट में सड़क चौड़ीकरण का काम इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करा रहा है। सड़क की मजबूती और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बजाय कथित तौर पर रोड़ी के स्थान पर आईबीएम सामग्री डाली जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विभागीय अधिकारी मौके पर क्या देख रहे हैं?
नियमों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण के दौरान दोनों तरफ निर्धारित तरीके से कटिंग कर उचित गुणवत्ता की रोड़ी डालने, उसे रोड रोलर से अच्छी तरह दबाकर समतल करने और इसके बाद निर्धारित परतों में बजरी व गिट्टी डालकर सड़क को मजबूत करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। लेकिन परवल-देवीपुर में आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया को ही दरकिनार किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल उस आईबीएम सामग्री को लेकर है, जिसका इस्तेमाल सड़क चौड़ीकरण में किए जाने के आरोप हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सामग्री कथित अवैध खनन से लाई जा रही है। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अवैध खनन और सरकारी निर्माण कार्य में अवैध सामग्री के इस्तेमाल तक पहुंच जाता है।
बरसात के मौसम में नदियों में खनन पर प्रतिबंध के बावजूद यदि निर्माण सामग्री खनन स्रोत से लाई जा रही है तो उसकी रॉयल्टी, रवन्ना, खनन पट्टा और परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच होना बेहद जरूरी है। सवाल यह भी है कि जिस सामग्री को सड़क में लगाया जा रहा है, उसका वैध स्रोत क्या है।
निर्माण कार्य खुले में हो रहा है। सामग्री भी मौके पर पहुंच रही है और सड़क पर बिछाई जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर है। यदि कार्य मानकों के अनुसार हो रहा है तो विभाग को इसकी गुणवत्ता और सामग्री के स्रोत को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में लापरवाही का खामियाजा भविष्य में आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। कमजोर आधार पर तैयार सड़क बरसात और भारी यातायात का दबाव झेल पाएगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
मामले में मौके पर इस्तेमाल हो रही सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में गुणवत्ता परीक्षण कराने के साथ-साथ उसके स्रोत की भी जांच जरूरी है। संबंधित विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि ठेकेदार को किस गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है और मौके पर वास्तव में कौन-सी सामग्री डाली जा रही है।
यदि जांच में मानकों का उल्लंघन, घटिया सामग्री अथवा अवैध खनन से प्राप्त सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अब सवाल सीधा है कि परवल-देवीपुर सड़क चौड़ीकरण में नियम चल रहे हैं या ठेकेदार की मनमानी? यदि सब कुछ नियम के मुताबिक है तो विभाग सामग्री की गुणवत्ता, स्रोत और निर्माण प्रक्रिया की जांच सार्वजनिक करने से क्यों हिचक रहा है?
