Hamarichoupal,22,05,2026
देहरादून।
नवोदित प्रवाह एवं
हिमालय विरासत ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में रचना संसार सभागार में प्रख्यात कवि डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी की जयंती के अवसर पर कवियों और गायक कलाकारों ने डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी द्वारा रचित गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दीं।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष और पूर्व प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन थे जबकि अध्यक्षता देश के , सुप्रसिद्ध वरिष्ठ गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की
और समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ कमला पंत ने समारोह की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया । इस अवसर पर प्रसिद्ध रचनाकारों और गायकों द्वारा डॉ गिरिजा शंकर त्रिवेदी के विभिन्न लोकप्रिय गीतों को अपनी शैली में प्रस्तुत किया गया । लोकप्रिय गायिका डॉ. सोनिया आनंद ने डॉ त्रिवेदी का बहुचर्चित गीत प्रस्तुत किया :
“ज्योति रथ बढ़ता चले, यह ज्योतिरथ बढ़ता चले ।
अंध दुर्गम घाटियों को,
वधिर युग परिपाटियों को,
पाटकर चौरस सतह पर
अथक अविरत आत्मनिर्भर ।
प्रसिद्ध गायिका लिली भट्ट ढौंडियाल ने मधुर स्वर में गीत प्रस्तुत किया –
“कविता अपने पर होती है, अपनेपन का कुछ अंत नहीं,
अपना पतझर भी होता है, अपना है सिर्फ बसंत नहीं।”
डॉ. क्षमा कौशिक ने ज्योति रथ काव्य कृति से गीत की प्रस्तुति दी –
“‘ शिखरों को चूमती
घाटियों में झूमती,
बिखरी है चांदनी ‘ ”
4.अजय जोशी ने द्वारा प्रस्तुत गीत :
नयनों के काजर से छाए
बादल अम्बर में दिखलाए
यौवन की मधु स्वप्न शिखा सी
विद्युत को निज अंक लगाए
दहक उठी रग रग में ज्वाला,संयम के शीतल संयम में।
ऐसी आई याद तुम्हारी, भर भर आया नीर नयन में।
दूनघाटी के मशहूर कवि गायक अरुण भट्ट ने संगीतके साथ गीत प्रस्तुत किया —
” तुम सिर्फ उठा लो साज आज,
मै मन का गीत सुना दूंगा ।
कवयित्री मणि अग्रवाल ‘ मणिका ‘ द्वारा प्रस्तुत गीत: ने सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया —
“बुनी है जीवन की जो कहानी,
न मै भुलाऊं न तुम भुलाना ।”
शास्त्रीय गायिका कुलबीर चन्नी ने अपनी शैलीमेन गीत प्रस्तुत किया —
“जितना सुख है मधुर मिलन में,
उतना ज्यादा दुख बिछुड़ने में । ”
इंगिता पुजारी जी द्वारा प्रस्तुत गीत:
“सांझ है बहार की, सुबह जहां खुमार की,
मै आ गया हूं उस डगर, मै आ गया हूं उस नगर । ”
. अंजू पांडेय ने डॉ त्रिवेदी के लोकगीत को प्रस्तुत किया —
“री अलबेली, सोन चमेली, भर दे दूध कटोरा,
कागा छत पै मचाए शोर, कोई घर आने वाला है ।”
.श्रद्धा मिश्रा आंचलिक पुट के साथ गीत गाया —
“पूरब के मधुवन की
मालिन रवि रश्मि चली !
रेशम तन, सौरभ मन, ज्योति वसन, हेम वरन
पैरों में कलरव के पायल छुम छुम छनन ”
. उर्मिला शर्मा द्वारा प्यार का गीत प्रस्तुत किया गया। —
‘ एक गीत प्यार का आओ गुन गुना तो लें ।
कब तक हंसे बहार , कब तलक फले फसल ।”
कवयित्री कविता बिष्ट ‘ नेह ‘ द्वारा प्रस्तुत गीत :
“रंग बहका ले नयन भले ही पल दो पल तक
किंतु गंध के बिना नहीं रम सकता है मन !”
डॉ. लक्ष्मी भट्ट द्वारा डॉ त्रिवेदी के पर्यावरण गीत को प्रस्तुत किया गया —
‘ धरती तन है, पवन प्राण है, पानी है जीवन
पावनकारी पावक हलचल, रक्षक नील गगन ।”
गीत समारोह की संचालक डॉ .भारती मिश्रा लोकप्रिय गीत कीप्रस्तुति दी —
“चांद तारों सजी असमां की गली,
मोड़ अपना बदलती रही रात भर ।”
अंत में धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार भूपत सिंह बिष्ट ने दिया।
