देहरादून। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित इलेक्ट्रिक बसों के चालक एवं कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुई हड़ताल मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रही। लगातार तीसरे दिन बस चालकों के काम पर नहीं लौटने से शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ने लगा है। इस बीच उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने आंदोलनरत कर्मचारियों के समर्थन में उतरते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।
उक्रांद महानगर देहरादून के पदाधिकारी मंगलवार को एकता विहार स्थित धरना स्थल पहुंचे और हड़ताल कर रहे इलेक्ट्रिक बस चालकों एवं कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया। महानगर अध्यक्ष प्रबीन चंद रमोला ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने के बजाय उन्हें धरना स्थल से हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
रमोला ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को पहले पुलिस लाइन और उसके बाद एकता विहार ले जाकर छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को उठाना कर्मचारियों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसे में आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें धरना स्थल से हटाने की कार्रवाई उचित नहीं है।
उक्रांद के केंद्रीय महामंत्री राजेंद्र बिष्ट ने कहा कि पार्टी अब कर्मचारियों के आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले एक-दो दिनों में स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने पार्टी के देहरादून महानगर सहित सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उक्रांद नेताओं ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय, केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सजवाण, राजेश्वरी रावत, रमा चौहान, रघुवीर सिंह राणा, महानगर महामंत्री कपिल कुमार, मुकेश कुंद्रा, भोला चमोली, निशिथ मनराल, राम भट्ट, अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
“ई-बसों के पहिए थमे, तीसरे दिन भी नहीं मानी हड़ताल; उक्रांद ने दी CEO-दफ्तर और डीएम कार्यालय घेरने की चेतावनी”
0
