चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। टनल में अचानक भारी मात्रा में पानी, पत्थर और मलबा घुसने से कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में अब तक नौ मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि छह मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार टनल के भीतर फंसे मजदूरों की तलाश में जुटे हैं।
हादसा गुरुवार शाम करीब छह से सात बजे के बीच हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मजदूर टनल के भीतर काम कर रहे थे, तभी करीब 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ। इसके बाद पानी के तेज बहाव के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया। अचानक आए इस मलबे की चपेट में वहां काम कर रहे मजदूर आ गए।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। रातभर बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। टनल में पानी, गाद और मलबा होने के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ताजा रिपोर्टों में बताया गया है कि कई मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जबकि लापता मजदूरों की तलाश जारी है।
हादसे में घायल मजदूरों को गोपेश्वर और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में घायलों और सुरक्षित निकाले गए मजदूरों की संख्या में अंतर सामने आया है। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ा प्रशासन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी फोन पर वार्ता कर टनल में फंसे उनके राज्यों के श्रमिकों की स्थिति की जानकारी दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के उपचार में किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी। घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में सुरंग निर्माण और पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े जलविद्युत प्रोजेक्टों में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है, निर्माणाधीन सुरंगों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, आपदा चेतावनी प्रणाली और श्रमिकों की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जरूरत है।
चमोली टनल हादसा: नौ मजदूरों की मौत, छह अब भी लापता, रातभर चला रेस्क्यू
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