Hamarichoupal.03,08,2026
देहरादून। जिज्ञासा विश्वविद्यालय (पूर्व में हिमगिरि ज़ी विश्वविद्यालय) में सोमवार से “उच्च शिक्षा के लिए जनरेटिव एआई: शिक्षण, अनुसंधान, मूल्यांकन और अकादमिक उत्कृष्टता का रूपांतरण” विषय पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नवीनतम उपयोगों से परिचित कराते हुए शिक्षण, अनुसंधान और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में इसके प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. इरफान खान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उच्च शिक्षा के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट रखना होगा, ताकि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और नवाचार आधारित शिक्षण का बेहतर वातावरण मिल सके।
प्रो वाइस चांसलर प्रो. डॉ. संदीप कौटिश ने कहा कि जनरेटिव एआई केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षण, अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में आईबीएम स्किल्स बिल्ड के प्रशिक्षक अमन श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को जनरेटिव एआई के विभिन्न टूल्स, प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा शिक्षा एवं शोध में एआई आधारित नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न एआई टूल्स का व्यावहारिक अभ्यास भी किया।
इस अवसर पर डीन रिसर्च एवं निदेशक आईक्यूएसी प्रो. डॉ. मनीष शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. जसनदीप सिंह, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।
