विकासनगर। विकासनगर क्षेत्र के लक्ष्मीपुर-रामपुर में कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहां एक बीजेपी नेता से जुड़े लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर प्लाटिंग का खेल चलाया जा रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस जमीन पर कभी आम के पेड़ों से लहलहाता घना बगीचा दिखाई देता था, वहां अब प्लॉट काटे जाने के लिए जमीन को तेजी से विकसित किया जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से खबर, कुछ समय पहले तक यह इलाका आम के हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ था। लेकिन अब बगीचे का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है। कहीं-कहीं पेड़ बचे हैं, जबकि कई हिस्सों में जमीन को समतल कर प्लाटिंग के लिए तैयार किए जाने के आरोप हैं।
सत्ता की छांव या नियमों की अनदेखी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्लाटिंग नियमों के मुताबिक नहीं हो रही है तो आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई लोग मिलकर जमीन के कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं और राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई से बचने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन जिस तरह कृषि और बागवानी वाली जमीनों का स्वरूप बदलकर प्लाटिंग की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, उससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं।
आम का बगीचा हुआ प्लाटिंग का शिकार?
लक्ष्मीपुर-रामपुर की यह तस्वीर सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त का मामला नहीं, बल्कि हरियाली के संरक्षण से भी जुड़ा सवाल है। सवाल यह है कि क्या जमीन को टुकड़ों में बांटकर मुनाफा कमाने की होड़ में वर्षों पुराने आम के पेड़ों और हरियाली की कीमत चुकाई जा रही है?
एक तरफ प्रशासन लगातार अवैध कॉलोनियों और नियम विरुद्ध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे मामलों के आरोप सामने आना कार्रवाई की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन पर है। सवाल साफ है—क्या लक्ष्मीपुर-रामपुर में हो रही कथित प्लाटिंग की जांच होगी? क्या जमीन की प्रकृति, पेड़ों की स्थिति, कॉलोनी की अनुमति और नक्शे से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी? और अगर नियमों का उल्लंघन मिला तो क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?
फिलहाल मामला जांच का विषय है, लेकिन लक्ष्मीपुर-रामपुर की बदलती तस्वीर यह सवाल जरूर छोड़ रही है कि क्या विकास के नाम पर हरियाली और नियम दोनों को पीछे छोड़ दिया गया है?
