देहरादून। डीआईटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की ओर से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (आईआईए), उत्तराखंड चैप्टर के सहयोग से विश्व वास्तुकला दिवस 2026 का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के वास्तु ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में वास्तुकला की सामाजिक जिम्मेदारी, आवास के अधिकार, विरासत संरक्षण और विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की थीम ‘आवास एक मानव अधिकार है, इसका निर्माण करें’ रखी गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि वास्तुकला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित आवास, बेहतर जीवनशैली, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और टिकाऊ विकास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में डीआईटी विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल एडवाइजर एन. रवि शंकर और प्रो-वाइस चांसलर डॉ. विनय शर्मा उपस्थित रहे। आयोजन का संयोजन डॉ. अभिलाषा पाठक और डॉ. अखिलेश कुमार ने किया, जबकि आर्किटेक्ट पूर्णिमा वर्मा, आर्किटेक्ट सोमनाथ भुई और आर्किटेक्ट उदिता देवरानी ने समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
विरासत संरक्षण पर विशेषज्ञ ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध संरक्षण वास्तुकार एवं विरासत विशेषज्ञ आर्किटेक्ट गुरमीत एस. राय का संवाद सत्र रहा। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन बस्तियों, सांस्कृतिक परिदृश्यों और विरासत आधारित विकास योजनाओं के संरक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। लाल किला और एलोरा की गुफाओं जैसे विश्व धरोहर स्थलों से संबंधित परियोजनाओं में कार्य कर चुकीं राय ने विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकास करने में वास्तुकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को वास्तुकला संरक्षण और विरासत प्रबंधन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराया। इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित रखना और उन्हें भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण है।
करियर की संभावनाओं पर हुई पैनल चर्चा
कार्यक्रम में ‘वास्तुकला के विद्यार्थियों के लिए करियर के अवसर’ विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसका संचालन डीआईटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की डीन प्रो. डॉ. एकता सिंह ने किया।
चर्चा में आईआईए उत्तराखंड चैप्टर के अध्यक्ष आर्किटेक्ट एम. एस. नेगी, संयुक्त सचिव आर्किटेक्ट संजय भार्गव, कार्यकारी सदस्य आर्किटेक्ट मेघा वशिष्ठ, डीआईटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग के प्रमुख प्रो. आर्किटेक्ट जितेंद्र कुमार सरोही और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार ने भाग लिया।
विशेषज्ञों ने वास्तुकला के क्षेत्र में रोजगार, पेशेवर अभ्यास, उद्यमिता, उच्च शिक्षा और नई विशेषज्ञताओं की संभावनाओं पर विचार रखे। साथ ही बदलते दौर में युवा वास्तुकारों के लिए तकनीकी दक्षता, रचनात्मक सोच और व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर जोर दिया। विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपने करियर संबंधी प्रश्नों के उत्तर और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।
इस दौरान आर्किटेक्ट मेघा वशिष्ठ ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स की भूमिका, स्टूडेंट चैप्टर और विभिन्न पेशेवर गतिविधियों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को वास्तुकला के पेशेवर समुदाय से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता में तनिषा मलिक प्रथम
विश्व वास्तुकला दिवस के अवसर पर ‘आर्किटेक्चर थ्रू द लेंस’ विषय पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने आवास, समुदाय, विरासत, जलवायु और दैनिक जीवन में वास्तुकला की भूमिका को तस्वीरों के माध्यम से रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में लगभग 46 वैध प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनका मूल्यांकन डीआईटी विश्वविद्यालय और आईआईए उत्तराखंड चैप्टर के पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया।
प्रतियोगिता में डीआईटी विश्वविद्यालय की तनिषा मलिक ने प्रथम स्थान हासिल किया। कियान गोंसाल्वेस और अद्वेका मिस्त्री संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, ध्रुव मेहता, अरहम अहमद और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के सौरभ चमोली ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया।
विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और चयनित तस्वीरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इससे विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा और वास्तुकला के प्रति दृष्टिकोण प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन आर्किटेक्ट पूजा शाह और आर्किटेक्ट सोमनाथ भुई ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव जोड़ने, वास्तुकला के पेशेवर अवसरों को समझने और समाज के प्रति वास्तुकारों की जिम्मेदारियों पर विचार करने का मंच मिला। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और अतिथियों, शिक्षकों, वास्तुकारों तथा विद्यार्थियों के बीच संवाद के साथ हुआ।
DIT विश्वविद्यालय में विश्व वास्तुकला दिवस पर हुआ मंथन, आवास के अधिकार और वास्तुकला के भविष्य पर हुई चर्चा
संरक्षण विशेषज्ञ गुरमीत एस. राय ने विद्यार्थियों को दिए विरासत संरक्षण के गुर, फोटोग्राफी प्रतियोगिता में तनिषा मलिक ने मारी बाजी
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