देहरादून। ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर महानगर कार्यालय में भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान लाखों परिवारों द्वारा झेली गई पीड़ा, संघर्ष, विस्थापन और त्याग की मार्मिक गाथा को चित्रों एवं स्मृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उस दौर की परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी और सीख है। यह दिवस हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर विभाजन के समय विस्थापित होकर आए परिवारों के बुजुर्गों का सम्मान किया गया। बुजुर्गों ने विभाजन के दौरान अपने परिवारों के साथ हुए संघर्ष, विस्थापन और कठिन परिस्थितियों से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उनकी आपबीती ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्मृति दिवस का उद्देश्य उन लाखों लोगों के त्याग और संघर्ष को याद करना है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद नए सिरे से जीवन शुरू किया और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखते हुए सशक्त, समरस एवं अखंड भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया गया।
विभाजन की विभीषिका को नमन।
राष्ट्र की एकता और अखंडता—हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।
विभाजन की विभीषिका की पीड़ा को किया याद, बुजुर्गों ने साझा कीं दर्दनाक स्मृतियां
महानगर कार्यालय में आयोजित प्रदर्शनी में विभाजन के दौरान विस्थापित परिवारों के संघर्ष और त्याग को किया गया नमन
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