देहरादून। केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से संचालित “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” रेशम उत्पादन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान के तहत देहरादून जनपद में दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। 13 और 14 अगस्त को चाकी रियरिंग सेंटर, सभावाला तथा चाकी रियरिंग सेंटर, लक्ष्मीपुर में आयोजित कार्यक्रमों में 80 से अधिक रेशमकीट पालकों एवं किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक-डी डॉ. सहदेव चौहान, वैज्ञानिक-सी एवं नोडल अधिकारी एमआरएमए 2.0 अभिषेक सिंह, निरीक्षक सभावाला फार्म राजीव चौहान, निरीक्षक लक्ष्मीपुर चाकी रियरिंग सेंटर अमित नेगी, ग्राम प्रधान सत्यपाल सहित केंद्रीय रेशम बोर्ड, रेशम निदेशालय उत्तराखंड के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशमकीट पालकों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन, उन्नत नस्लों, शहतूत की वैज्ञानिक खेती, अधिक उत्पादन देने वाली शहतूत किस्मों, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, पालन गृह व उपकरणों की स्वच्छता तथा कीटाणुशोधन की जानकारी देना रहा। इसके साथ ही उन्नत रियरिंग उपकरणों और जलवायु अनुकूल रेशम उत्पादन तकनीकों के बारे में भी किसानों को प्रशिक्षित किया गया।
विशेषज्ञों एवं तकनीकी अधिकारियों ने किसानों को रेशमकीट पालन के विभिन्न चरणों में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक तकनीकों और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी। किसानों की स्थानीय समस्याओं और तकनीकी जरूरतों को समझते हुए उनके सवालों का समाधान भी किया गया।
उन्नत तकनीक पर तैयार पंपलेट का विमोचन
सभावाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान “उन्नत रेशमकीट पालन की वैज्ञानिक तकनीक” विषय पर तैयार तकनीकी पंपलेट का विमोचन एवं वितरण किया गया। पंपलेट में शहतूत रेशमकीट पालन से जुड़ी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसान इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान “मेरा रेशम मेरा अभिमान 1.0” अभियान के तहत पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त किसानों से भी संवाद किया गया। उनसे अभियान के प्रभाव और अपनाई गई तकनीकों को लेकर फीडबैक लिया गया। किसानों के सुझावों और अनुभवों को आगामी गतिविधियों की योजना एवं तकनीकी हस्तांतरण को और प्रभावी बनाने के लिए उपयोगी इनपुट के रूप में लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि किसानों की सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ है कि रेशमकीट पालकों में वैज्ञानिक तकनीकों और नवीनतम जानकारी को अपनाने के प्रति सकारात्मक रुचि बढ़ रही है। केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं रेशम निदेशालय उत्तराखंड द्वारा आयोजित इन जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य देहरादून जनपद में वैज्ञानिक, टिकाऊ एवं लाभकारी रेशम उत्पादन को बढ़ावा देना तथा रेशमकीट पालकों की आय और आजीविका को मजबूत करना है।
रेशम की डोर से किसानों की किस्मत बदलने की तैयारी, 80 से ज्यादा पालकों को मिला वैज्ञानिक ज्ञान
‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ ने पकड़ी रफ्तार, 80 से ज्यादा पालकों को मिला तकनीकी प्रशिक्षण
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