नई दिल्ली, 7 अगस्त। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रजनन स्वास्थ्य, बाल अधिकार, बच्चों की सुरक्षा और ‘एज ऑफ कंसेंट’ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों से जुड़े किसी भी कानूनी या नीतिगत निर्णय में उनके सर्वोत्तम हित, गरिमा, सुरक्षा और भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
डॉ. गीता खन्ना ने ‘समग्र न्यायिक अभियान’ में भी सहभागिता की। अभियान का उद्देश्य प्रजनन स्वास्थ्य और प्रजनन देखभाल के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इसके तहत आईवीएफ, बांझपन, प्रजनन संबंधी समस्याओं, समय पर प्रजनन तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने जैसे विषयों पर व्यापक जनसंवाद किया जाएगा। अभियान के माध्यम से धार्मिक गुरुओं, सामाजिक एवं सामुदायिक नेताओं, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती मलिका नड्डा और श्री अन्ना साहेब जोल्जे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। पहल की शुरुआत पूज्य श्री कासिदेश्वर स्वामी जी, कोल्हापुर जिले के मठ तथा डॉ. वर्षा पाटिल द्वारा की गई है।
‘एज ऑफ कंसेंट’ कम करने की मांग पर जताई चिंता
इसी क्रम में डॉ. गीता खन्ना ने ‘Beyond the Debate: Age of Consent and Road Ahead’ रिसर्च रिपोर्ट के विमोचन और परिचर्चा में भी भाग लिया। कार्यक्रम में ‘एज ऑफ कंसेंट’ यानी सहमति की आयु कम करने की मांग और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
परिचर्चा में वक्ताओं ने सहमति की आयु कम किए जाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी कानूनी बदलाव का आधार बच्चों की सुरक्षा और उनका सर्वोत्तम हित होना चाहिए। वक्ताओं ने आशंका जताई कि ऐसे बदलाव से बाल विवाह, किशोरावस्था में गर्भधारण तथा बच्चों के विरुद्ध हिंसा और शोषण जैसी परिस्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है।
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी निर्णय से पहले बच्चे की गरिमा, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन, शांति सुरक्षा और सद्भाव ट्रस्ट, मेधा फाउंडेशन ट्रस्ट तथा Network for Access to Justice and Multidisciplinary Outreach Foundation के संयुक्त प्रयास से किया गया। कार्यक्रम में NCPCR की पूर्व अध्यक्ष एवं NHRC की सदस्य श्रीमती प्रियंका नूनगो सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने तथा बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में व्यापक जनसंवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली : बाल अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, ‘एज ऑफ कंसेंट’ पर डॉ. गीता खन्ना ने जताई चिंता
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