विकासनगर(आरएनएस)। उत्तराखंड क्रांति दल ने उत्तराखंड को हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाले भीमावाला-नावघाट पुल के निर्माण को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि लगभग 44 करोड़ रुपये की लागत से बना 540 मीटर लंबा पुल आज भी उपयोग में नहीं आ सका है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश की ओर बनने वाली करीब 250 मीटर एप्रोच रोड का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है। उक्रांद के विकासनगर शहर कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविन्द तोमर तथा ब्लॉक अध्यक्ष सौरभ उनियाल ने संयुक्त बयान में कहा कि नवंबर 2021 में पुल का शिलान्यास हुआ था। उत्तराखंड सरकार ने अपने हिस्से का मुआवजा देकर पुल का निर्माण पूरा करा दिया, लेकिन हिमाचल प्रदेश की सीमा में आने वाली संपर्क सड़क का विवाद सुलझाए बिना परियोजना को आगे बढ़ाना सरकारी अदूरदर्शिता का उदाहरण है।नेताओं ने सवाल उठाया कि जब हिमाचल की ओर भूमि और मुआवजे का विवाद पहले से लंबित था, तो दोनों राज्यों के बीच समन्वय और आवश्यक मंजूरी के बिना करोड़ों रुपये खर्च कर पुल का निर्माण क्यों कराया गया। उक्रांद का कहना है कि संपर्क मार्ग नहीं बनने से पुल आज भी आम लोगों के लिए बेकार साबित हो रहा है। बरसात के मौसम में ग्रामीणों को नदी पार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि क्षेत्र के किसानों को अपनी नकदी फसलें विकासनगर मंडी तक पहुंचाने के लिए आज भी लगभग 15 किमी का अतिरिक्त और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ रहा है। अरविंद तोमर ने आरोप लगाया कि यह सरकारी धन की बर्बादी का मामला है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सौरभ उनियाल ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द हिमाचल सरकार से वार्ता कर संपर्क मार्ग का विवाद नहीं सुलझाया तो उत्तराखंड क्रांति दल ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू करेगा।
44 करोड़ का नवाघाट पुल बना सफेद हाथी : उक्रांद
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