Hamarichoupal,27,06,2026
देहरादून, 27 जून। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी सोलर थर्मल बैटरी विकसित की है, जो सूर्यास्त के बाद भी 12 से 14 घंटे तक गर्म पानी उपलब्ध करा सकती है। यह तकनीक ‘फेज चेंज मटेरियल’ (पीसीएम) के माध्यम से सौर ताप को संग्रहीत करती है, जिससे पानी गर्म करने के लिए बिजली और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. अनीता नेने और डॉ. रोहित घाडगे द्वारा विकसित इस प्रणाली में शेफलर सोलर कंसंट्रेटर को पैराफिन वैक्स आधारित थर्मल स्टोरेज कैप्सूल के साथ जोड़ा गया है। पैराफिन वैक्स बड़ी मात्रा में ऊष्मा को संग्रहित कर आवश्यकता पड़ने पर धीरे-धीरे छोड़ता है, जिससे लंबे समय तक गर्म पानी उपलब्ध रहता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक लगभग 55 प्रतिशत थर्मल दक्षता प्रदर्शित करती है। प्रयोगशाला परीक्षणों में यह प्रणाली करीब 18 मिनट में पूरी तरह चार्ज और 32 मिनट में डिस्चार्ज हुई। इसका प्रोटोटाइप 1.5 से 2 किलोवाट-घंटा (kWh) तापीय ऊर्जा संग्रहीत कर सकता है तथा चार्जिंग के बाद 50 से 60 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला पानी लगभग 14 घंटे तक उपलब्ध कराता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रणाली ऊर्जा को सीधे गर्मी के रूप में संग्रहित करती है, जिससे इलेक्ट्रोकेमिकल बैटरियों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसमें अलग की जा सकने वाली पीसीएम ट्यूब, वॉटर-जैकेट हीट ट्रांसफर सिस्टम और पॉलीयुरेथेन इंसुलेशन का उपयोग किया गया है, जिससे ऊष्मा का संरक्षण बेहतर होता है।
शोधकर्ताओं का दावा है कि पारंपरिक इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर की तुलना में यह तकनीक हर वर्ष लगभग 2.5 से 3 टन कार्बन उत्सर्जन कम कर सकती है, जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास लक्ष्यों को मजबूती देगी।
डॉ. अनीता नेने ने बताया कि सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती सूर्य की अनुपस्थिति में उसकी उपलब्धता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए एक सरल, किफायती और टिकाऊ थर्मल स्टोरेज समाधान विकसित किया गया है। वहीं, डॉ. रोहित घाडगे ने कहा कि तापीय ऊर्जा कुल ऊर्जा खपत का बड़ा हिस्सा है और ऐसी तकनीकें ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के साथ पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला परीक्षणों के साथ कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD) सिमुलेशन के माध्यम से भी प्रणाली का मूल्यांकन किया है। यह तकनीक वर्तमान में टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल (TRL)-7 पर पहुंच चुकी है और वास्तविक परिस्थितियों में पायलट परियोजनाओं के लिए तैयार की जा रही है।
इस तकनीक का उपयोग भविष्य में आवासीय वॉटर हीटिंग सिस्टम, होटल, अस्पताल, छात्रावास, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों, सामुदायिक रसोई, कृषि कार्यों तथा ऑफ-ग्रिड ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इस नवाचार के लिए “Solar Energy Storage Capsule Using Phase Change Material” शीर्षक से भारतीय पेटेंट (आवेदन संख्या 202521118546) भी दायर किया गया है। शोधकर्ता अब इसके व्यावसायीकरण और बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग की दिशा में काम कर रहे हैं।
