सहसपुर। देहरादून जिले की सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के बटौली गांव में मानसून की बारिश ग्रामीणों के लिए हर साल नई मुसीबत लेकर आती है। बारिश के दौरान गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला रास्ता मलबे और भूस्खलन के कारण खतरनाक हो जाता है। कई बार संपर्क पूरी तरह बाधित होने से ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर बच्चों के स्कूल जाने तक में जोखिम बना रहता है।
ग्रामीणों के मुताबिक बीते साल भारी बारिश के दौरान इलाके में बड़ी मात्रा में मलबा और पानी आया था। पहाड़ का एक हिस्सा खिसकने से सड़क के पास गहरी खाई बन गई थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं।
उस दौरान ग्रामीणों को झूला पुल निर्माण, एप्रोच रोड तैयार करने और मोबाइल नेटवर्क के लिए टावर लगाने सहित कई आश्वासन दिए गए थे। मानसून के दौरान गांव से बाहर रहने वाले ग्रामीणों के लिए किराए की व्यवस्था किए जाने का भरोसा भी दिलाया गया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि एक साल बीतने के बावजूद उनकी मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक रास्ते को दुरुस्त करने के लिए कुछ मजदूर लगाए गए हैं, लेकिन खतरनाक नाले तक पहुंचने वाली एप्रोच रोड और स्थायी संपर्क मार्ग की समस्या अभी भी बरकरार है। बारिश बढ़ने के साथ ग्रामीणों को एक बार फिर गांव के मुख्य संपर्क से कटने की चिंता सताने लगी है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
बटौली गांव की सड़क की समस्या को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता आर्येंद्र शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में बनाए गए रास्ते आज भी बेहतर स्थिति में हैं, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में बनाए गए कई रास्ते बारिश और भूस्खलन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
आर्येंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि सहसपुर विधानसभा के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
हालांकि सड़क निर्माण और प्रशासन की ओर से किए गए कार्यों को लेकर सरकार अथवा संबंधित विभाग का पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग और कांग्रेस के आरोपों के साथ-साथ प्रशासन की ओर से किए गए दावों तथा वास्तविक प्रगति की भी जांच जरूरी है।
चुनाव से पहले फिर गरमाया मुद्दा
विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच बटौली जैसे ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों की सड़क, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्याएं एक बार फिर राजनीतिक मुद्दा बनती नजर आ रही हैं। ग्रामीणों के लिए यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि बरसात के दौरान सुरक्षित आवागमन और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचने की सुविधा से जुड़ा है।
फिलहाल बटौली के ग्रामीण स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि बरसात से पहले सुरक्षित सड़क और संपर्क मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि हर मानसून में उन्हें बाकी दुनिया से कटने का खतरा न झेलना पड़े।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, ग्रामीणों की सुरक्षा का भी है। अब देखना होगा कि बटौली को स्थायी और सुरक्षित संपर्क मार्ग कब तक मिल पाता है।
हर बारिश में कट जाता है बटौली, फिर भी नहीं जागता सिस्टम : आर्येंद्र
बटौली में सड़क का संकट, मानसून में गांव का संपर्क टूटने से बढ़ी मुश्किलें
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