देहरादून,05,01,2025
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ऋषिकेश के पशुलोक और उससे जुड़े 2866 एकड़ भूमि विवाद पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर 2025 को माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद वन भूमि पर वर्षों से रह रहे हजारों परिवारों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है।
यशपाल आर्य ने पत्र में उल्लेख किया कि यह भूमि वर्ष 1952 के आसपास महात्मा गांधी की शिष्या मीरा बेन को लीज पर दी गई थी, जहां पशुलोक सेवा समिति के माध्यम से पशुपालन का कार्य शुरू हुआ। समय के साथ यहां आबादी भी बसती चली गई और इसी क्षेत्र में एम्स ऋषिकेश, आईडीपीएल जैसे बड़े सरकारी संस्थान तथा टिहरी विस्थापितों का पुनर्वास भी किया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का 65 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन भूमि है और राज्य के पर्वतीय, भावर, तराई व मैदानी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पीढ़ियों से वन भूमि पर निवासरत हैं। इसके बावजूद वनाधिकार कानून 2006 का प्रदेश में समुचित क्रियान्वयन नहीं हो पाया, जिससे लोगों को अब भी कब्जेदार माना जा रहा है।
यशपाल आर्य ने बिंदुखत्ता, मालधन चौड़, गौलापार, दमुवाढुंगा, पिंडर घाटी और पौड़ी जनपद जैसे कई क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों से बसे गांवों को उजाड़ने के नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एकतरफा कार्रवाई से प्रदेश में अशांति और कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।
पत्र के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वन भूमि पर निवासरत लोगों के अधिकारों और समस्याओं पर विचार के लिए उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए, ताकि न्यायसंगत और वैधानिक समाधान निकाला जा सके।
