राकेश मैन्दोला
प्रकृति की खूबसूरत फिजा उत्तराखंड के पहाड़ियों में जहां वन संपदा पूरे भारत से सबसे अधिक हैं वन संपदा का खजाना है वन्यजीवों का बोलबाला है वर्तमान में प्राकृतिक असंतुलन ने भालुओं की नींद उड़ा रखी है भालूओं ने आमजन की नींद उड़ा रखी है यानी कि प्रकृति के असंतुलन ने सभी को परेशान कर दिया है वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की राय माने तो भालू शीत निद्रा अर्थात हाइबरनेशन में रहता है बर्फबारी कम होने के कारण से भालू हाइबरनेशन में जाने में परेशानी महसूस कर रहे हैं कारण स्पष्ट है बर्फबारी का समय पर ना होना और कम होना जिस कारण से भालू आबादी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जनवरी से अब तक भालू हमले की घटनाएं नौ एवं गत वर्ष में 116 घटनाएं हुई जिसमें आठ लोगों की मृत्यु हो गई थी 108 लोग घायल हुए थे बर्फबारी का असंतुलन होने के कारण से भालूओ के जीवन में भी असंतुलन पैदा होता जा रहा है वन्य विशेषज्ञों एवं वानिकी विशेषज्ञों की राय माने तो भालू बर्फबारी के बाद जब शीत निद्रा में जाते हैं तभी भालू का जीवन एवं प्रकृति का संतुलन माना जाता है
आकाश वर्मा वन संरक्षक गढ़वाल मंडल के अनुसार भालू कुछ इलाकों में सक्रिय हैं भोजन की तलाश में वह आम जनता तक पहुंच रहे हैं उनकी सक्रियता का एक बड़ा कारण बर्फबारी में कमी होना जिस कारण से उनकी शीत निद्रा नहीं हो पा रही है ऐसे इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है
माना जाता है कि 2500 मीटर की ऊंचाई पर 3 महीने तक लगातार एक फीट गहरी बर्फ जमी होनी चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है जो की उत्तराखण्ड के ग्लेशियरयों के लिए बहुत जरूरी है
सामान्य रूप से जब प्रकृति का संतुलन ठीक स्थिति में होता है तब दिसंबर से जनवरी के बीच तक कम से कम 5 से 6 बार बर्फबारी हो जाती है जो की लगभग एक दशक से नहीं हो पा रही है
वानिकी की विशेषज्ञ डा० नागेन्द्र टोडरिया का मानना है कि प्रकृति का संतुलन हिमालय क्षेत्र के सभी प्रकार के जीव जंतुओं के लिए आवश्यक है लेकिन वातावरण के असंतुलन प्रदूषण विकास की प्रक्रियाओं ने कहीं ना कहीं वातावरण को बदल दिया है जिस कारण से उत्तराखंड में बर्फबारी का असंतुलन हो चुका है जिस कारण से भालू अपनी प्रकृति गोद से उतरकर मानवीय क्षेत्र में सक्रिय हो गया इस कारण से लगातार उत्तराखंड की जनता को एवं वन्य विभाग को इस विषय पर पुनर्विचार करना पड़ेगा की भालू की नींद को कैसे पूरा किया जाए अन्यथा भालू आमजन की नींद उड़ा के रखेगा क्योंकि पेड़ तो कट रहे हैं लग नहीं रहे ओर गर्मी आते ही जंगलों मे आग का प्रकोप फैल जाता है जो की उत्तराखंड के पर्यावरण को पूरी तरीके सेअसंतुलित कर रही है
उत्तराखंड मे पर्यावरण के बिगड़ते असंतुलन ने केवल भालूओ की नींद नही वरन वन विभाग एवं आम जन की नींद उडा दी है जिसका एक मात्र उपाय केवल पर्यावरण को संतुलित करना ही हैअन्यथा ये घटनाएं लगातार बढ़ती जाएगी ?
राकेश मैन्दोला
स्वतंत्र लेखन
प्रेमनगर
मान्डूवाला
देहरादून -248007
Ph 9410552256
