हमारी चौपाल
देहरादून, 29 जुलाई।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तराखण्ड ठेकेदार संयुक्त जन मंच समिति ने प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और टेंडर व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। समिति के महासचिव तारा चंद ने आरोप लगाया कि स्थानीय डी-क्लास ठेकेदार लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जबकि बाहरी राज्यों के ठेकेदारों को बढ़ावा मिलने से प्रदेश के पंजीकृत ठेकेदारों का रोजगार प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई सहित विभिन्न योजनाओं के तहत कई विकास कार्य स्थानीय ठेकेदारों ने पूरे कर सरकार को सौंप दिए, लेकिन आज तक उनका भुगतान नहीं किया गया। लंबित भुगतानों के कारण छोटे ठेकेदारों और उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
प्रेसवार्ता में ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, अनुबंध संबंधी जटिलताओं और स्थानीय श्रमिकों के रोजगार की अनदेखी पर भी नाराजगी जताई। समिति ने मांग की कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किए जाएं और स्थानीय ठेकेदारों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए।
इस दौरान महासचिव तारा चंद ने ब्यूरोक्रेसी को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए आरोप लगाया कि अधिकांश टेंडर पहले ही “बेचे जा चुके हैं” और यदि तीन दिन के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
समिति ने स्पष्ट किया कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनों की रणनीति अपनाई जाएगी।
प्रेसवार्ता में समिति के अध्यक्ष संजय पोखरियाल, महासचिव तारा चंद, हर्षवर्धन शर्मा, मनोज कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं ठेकेदार मौजूद रहे।
