हमारी चौपाल
देहरादून, 25 जुलाई। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शनिवार को अल्पसंख्यक आयोग और शिक्षा विभाग के साथ मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विनियमन और विभागीय समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में संस्थानों की मान्यता, पारदर्शिता, बाल सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी।
बैठक में आयोग के सदस्य दयाल सिंह, सदस्य श्रीमती बबीता सहौत्रा, सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल, अनुसचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष बलजीत सिंह सोनी, उपशिक्षा निदेशक डॉ. सुरेन्द्र सिंह नेगी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि कई शिक्षण संस्थान बिना राज्य अथवा केंद्र सरकार से वैध अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त किए स्वयं को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर संचालित कर रहे हैं। इस पर स्पष्ट किया गया कि वैध प्रमाण-पत्र के बिना कोई भी संस्थान स्वयं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं कह सकता।
आयोग ने यह भी संज्ञान लिया कि कुछ कथित अल्पसंख्यक संस्थानों में संबंधित समुदाय के विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम या नगण्य है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई, आईसीएसई और उत्तराखण्ड बोर्ड केवल संबद्धता प्रदान करते हैं, जबकि विद्यालयों को मान्यता देने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है।
बैठक में सभी विद्यालयों के लिए आयोग की एसओपी, ऑडिट प्रोफार्मा और दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य करने, प्रवेश के समय जन्म प्रमाण-पत्र का सत्यापन, छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश संबंधी नियमों का पालन तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी अनुपालन के लिए संयुक्त निरीक्षण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा मदरसों में संचालित छात्रावासों, भोजन और शयन व्यवस्था के नियमित निरीक्षण, वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, मातृभाषा, भारतीय संस्कृति और टोल-फ्री हेल्पलाइन संबंधी दिशा-निर्देशों के प्रभावी अनुपालन तथा विभागों के बीच सूचना आदान-प्रदान के लिए समन्वित तंत्र विकसित करने पर भी सहमति बनी।
बैठक के अंत में सभी विभागों ने राज्य के मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा और कानूनों के प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर समन्वित रूप से कार्य करने का निर्णय लिया।
