अनुराग गुप्ता
विकासनगर/सेलाकुई। सेलाकुई स्थित प्रेस क्लब में गढ़वाली गीत ‘लाडी मैणा की’ की टीम की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान टीम के सदस्यों ने गीत की विषयवस्तु, निर्माण के उद्देश्य और दर्शकों से मिल रहे रिस्पॉन्स को लेकर मीडिया से बातचीत की।
गीत के गीतकार कुलदीप नवल ने बताया कि उत्तराखंड की प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद व्यापक है। मां नंदा को देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है। राजजात की परंपरा में मां नंदा अपने मायके चमोली से कैलाश के लिए प्रस्थान करती हैं। यह विदाई पूरे क्षेत्र के लिए बेहद भावुक क्षण होती है। गीत में इसी परंपरा और मायके से विदाई के भाव को शब्दों और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने बताया कि विदाई के दौरान मां नंदा के बार-बार पीछे मुड़कर अपने मायके को निहारने और मायके पक्ष की ओर से भविष्य में दोबारा बुलाने का निमंत्रण भेजने की भावनात्मक परंपरा को गीत की कहानी का आधार बनाया गया है।
गीत के निर्देशक राहुल बोरियांन ने बताया कि रिलीज के महज दो दिनों में गीत को करीब 10 हजार लोगों द्वारा देखा जा चुका है। दर्शकों से मिल रहे इस सकारात्मक रिस्पॉन्स ने पूरी टीम का उत्साह और मनोबल बढ़ाया है।
वहीं संगीत निर्देशक आशीष नवल ने बताया कि गीत के निर्माण और फिल्मांकन में पूरी टीम ने अपने स्तर से सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि इस गीत को तैयार करने के लिए किसी बाहरी सहयोग का सहारा नहीं लिया गया और टीम के सदस्यों ने मिलकर इसे आकार दिया।
गीत की गायिका रिंकी नेगी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में मायके से ससुराल की ओर विदा होने वाली बेटी के भावुक क्षणों की अपनी विशेष संवेदना है। इसी भाव को मां नंदा की विदाई से जोड़ते हुए गीत के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया गया है।
प्रेस वार्ता में टीम ने उम्मीद जताई कि ‘लाडी मैणा की’ गीत उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और मां नंदा से जुड़ी भावनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
