देहरादून, 20 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित पुराने जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर उसे आधुनिक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पार्क अब क्षेत्रवासियों के लिए हरियाली, जल संरक्षण, स्वास्थ्य और मनोरंजन का नया केंद्र बन गया है।
पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जलस्रोत को संरक्षित करते हुए पार्क में नौकायन की व्यवस्था, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग आधारित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण किया और परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए विकास परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रहा है। मियांवाला में पुराने जलस्रोत का संरक्षण इसी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत को संरक्षित कर आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना भी है।
पार्क में जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली इसकी खूबसूरती बढ़ा रहे हैं। योग और वॉकिंग जैसी गतिविधियों के साथ नौकायन की सुविधा इसे परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रही है।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। पुराने तालाब और जौहड़ को संरक्षित कर उसे आधुनिक जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देगा।
सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बढ़ते शहरीकरण के बीच पुराने जलस्रोतों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देना शहर के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण बनकर सामने आया है।
मियांवाला में 8.63 करोड़ से संवर गया जल-सृष्टि पार्क, पुराने जौहड़ को मिला नया जीवन
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