शशांक सक्सेना की भूमिका पर भी उठे सवाल, 15–20 बीघा जमीन पर कथित अवैध प्लॉटिंग के मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करे एमडीडीए
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राधिकरण के कार्यालय से जारी एक आधिकारिक पत्र सरकारी कार्रवाई की गंभीरता और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर कर रहा है। बहादुरपुर रोड, देहरादून स्थित करीब 15 से 20 बीघा भूमि पर कथित तौर पर बिना अनुमति सड़क और भूखंडों का निर्माण किए जाने के मामले में प्राधिकरण ने बाकायदा ध्वस्तीकरण की तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की थी। इतना ही नहीं, कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया था। लेकिन अब 1 नवंबर हो चुकी है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौके पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई है।
प्राधिकरण के पत्र संख्या 371, वाद संख्या एल-0095/एस-सेलाकुई/2024 के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में विपक्षी कृष्ण शर्मा, रवि चौधरी आदि के नाम का उल्लेख करते हुए बहादुरपुर रोड स्थित भूमि पर लगभग 15–20 बीघा क्षेत्र में कथित अनधिकृत प्लॉटिंग का मामला उठाया गया था। पत्र में उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई का हवाला देते हुए 15 अक्टूबर को अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त करने की तिथि तय की गई थी।
हैरानी की बात यह है कि प्राधिकरण ने इस कार्रवाई के लिए पूरी प्रशासनिक तैयारी का उल्लेख पत्र में किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक, सेलाकुई थाना प्रभारी, नायब तहसीलदार विकासनगर और संबंधित अभियंताओं को निर्देशित किया गया था। यहां तक कि संबंधित अभियंताओं को निर्धारित तिथि पर प्राधिकरण कार्यालय में उपस्थित रहकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित कराने और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
सवाल शशांक सक्सेना की भूमिका पर भी
एमडीडीए में सहायक अभियंता के पद पर तैनात शशांक सक्सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्राधिकरण के पत्र में संबंधित क्षेत्रीय सहायक अभियंता और अवर अभियंता को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित क्षेत्र की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी और निर्धारित तिथि पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
आखिर 15 अक्टूबर को जिस कार्रवाई के लिए पुलिस बल की व्यवस्था तक मांगी गई थी, वह 1 नवंबर तक क्यों नहीं हो पाई? क्या पुलिस बल उपलब्ध नहीं हुआ? क्या प्राधिकरण की टीम मौके पर नहीं पहुंची? क्या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई स्थगित कर दी गई? यदि स्थगित की गई तो किसके आदेश पर और किन कारणों से?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्राधिकरण को कथित अवैध प्लॉटिंग की जानकारी थी, वाद भी दर्ज था और ध्वस्तीकरण की तारीख भी निर्धारित कर दी गई थी, तो फिर कार्रवाई में देरी की वजह क्या है?
कागजों में सख्ती, जमीन पर खामोशी क्यों?
एमडीडीए लगातार अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान चलाने के दावे करता रहा है। लेकिन इस मामले में जारी आधिकारिक पत्र और निर्धारित तारीख के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। यदि आदेश के बावजूद ध्वस्तीकरण नहीं हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि एमडीडीए के उपाध्यक्ष और उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करते हैं या फिर यह आदेश भी अन्य आदेशों की तरह सरकारी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा। प्राधिकरण को स्पष्ट करना चाहिए कि बहादुरपुर रोड की कथित अवैध प्लॉटिंग पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और ध्वस्तीकरण की अगली तारीख कब निर्धारित की गई है।
