देहरादून(आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद उत्तराखंड में अवैध निर्माणों, अवैध प्लाटिंग और आवासीय भवनों में बिना अनुमति संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। प्रदेशभर में विकास प्राधिकरणों ने नियमों के उल्लंघन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। देहरादून में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने करीब 2200 लोगों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि हरिद्वार में 570 से अधिक निर्माणों को लेकर नोटिस दिए जा चुके हैं। अन्य जिलों में भी सर्वे और अवैध निर्माणों के चिह्नीकरण की प्रक्रिया चल रही है।
उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उहुडा) के निर्देश पर एमडीडीए, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) समेत सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण करने वालों के साथ ही आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत दुकानें, रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित करने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
देहरादून में एमडीडीए ने आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के मामलों में करीब 2200 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। हरिद्वार में नक्शे के विपरीत निर्माण करने वाले 570 से अधिक लोगों को नोटिस दिए गए हैं। पौड़ी जिले में 28 निर्माणों के संबंध में सीलिंग नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, पिथौरागढ़ में आवासीय भवनों में कोचिंग संस्थान समेत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले पांच लोगों को नोटिस दिए गए हैं।
नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर जिलों में भी अवैध निर्माणों और आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल का ब्योरा जुटाया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शासन के निर्देश पर अधिसूचित विकास क्षेत्रों, कॉलोनियों और आवासीय सोसाइटियों में व्यापक सर्वे कराया जा रहा है। इसमें उन भवनों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किया गया है या आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में बिना जरूरी अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
नियमों के तहत संबंधित मामलों में पहले सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद नोटिस, सुनवाई और अन्य निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए ध्वस्तीकरण पर निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों को कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं करने और सभी मामलों में नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में प्रत्येक विकास प्राधिकरण में नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा। संबंधित अधिकारी का ईमेल सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि लोग अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकें। इसके लिए समर्पित डिजिटल पोर्टल संचालित करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान पुलिस तथा जिला प्रशासन की शत-प्रतिशत तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह के अनुसार, प्रदेश के सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों और निकायों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरणों ने नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में तेजी से बढ़ते निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के बीच इस अभियान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सर्वे में चिह्नित मामलों पर होने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ता है।
अब उत्तराखंड में अवैध निर्माणों पर महाअभियान, दून में 2200 को नोटिस
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