हमारी चौपाल
देहरादून, 27 जुलाई। कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए दी जाने वाली अनुग्रह राशि को डेढ़ करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता का परिचय देकर दुश्मन को परास्त किया और विश्व के सामने भारत की सैन्य क्षमता का परिचय कराया।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 जवान भी शामिल थे। उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि वीरभूमि भी है और यहां की सैन्य परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की जा चुकी है। बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, वीरता पुरस्कार विजेताओं की सहायता राशि में वृद्धि, राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा, स्टाम्प शुल्क में छूट और शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता जैसी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के ‘पांचवें धाम’ सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। साथ ही सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित किया जा रहा है तथा उन्हें पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य हो रहा है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (सेवानिवृत्त), जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल, पूर्व सैनिक, सैन्य अधिकारी एवं शहीदों के परिजन उपस्थित रहे।
