HamariChoupal,10,06,2026
विकासनगर/राजधानी देहरादून और विकासनगर क्षेत्र में सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक कथित संगठित भूमाफिया नेटवर्क का मामला अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर कथित फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच अब जेल की सलाखों के पीछे से रंगदारी, सुपारी और फायरिंग की वारदातें भी सामने आने लगी हैं। देहरादून पुलिस की कार्रवाई में एक शूटर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क के कई चौंकाने वाले पहलू उजागर हुए हैं।
14 बीघा सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप
मामले की शुरुआत विकासनगर क्षेत्र के ईस्ट होप टाउन इलाके से हुई, जहां एक शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर भूमाफिया संजय राजपूत, उसकी पत्नी सीमा नेगी तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत इस्लाम पुत्र हनीफ को एक कंपनी का प्रतिनिधि दर्शाकर राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की और करीब 14 बीघा सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद तहसीलदारों और लेखपालों की फर्जी मोहरें तथा जाली हस्ताक्षर तैयार कर सरकारी जमीन को अलग-अलग लोगों के नाम बेच दिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस कथित फर्जीवाड़े में 32 परिवारों को जमीन बेचकर करोड़ों रुपये की वसूली की गई। इतना ही नहीं, खरीदारों को बैंक ऋण दिलाने के लिए कथित रूप से फर्जी क्लियरेंस प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराए गए।
बताया जा रहा है कि तहसीलदार विकासनगर की जांच आख्या में खाता संख्या 2284, 2202 तथा खसरा संख्या 870मि से जुड़े मामलों में सीमा नेगी और संजय राजपूत की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
जेल में दोस्ती टूटी, शुरू हुई रंगदारी
जमीन घोटाले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जानकारी के अनुसार संजय राजपूत और मंजीत हत्याकांड का आरोपी अर्जुन पुत्र बलवान देहरादून जिला कारागार में एक साथ बंद थे।
सूत्रों के मुताबिक दोनों के बीच पहले घनिष्ठ संबंध थे, लेकिन बाद में पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद शुरू हो गया। अर्जुन का आरोप था कि उसने संजय राजपूत के कहने पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया, लेकिन बदले में वादा की गई रकम उसे नहीं मिली। इसी विवाद के चलते अर्जुन ने कथित रूप से संजय राजपूत से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और रकम न मिलने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।
धमकी को अंजाम देने के लिए दी गई सुपारी
पुलिस जांच के अनुसार धमकी को अमलीजामा पहनाने के लिए जेल से बाहर मौजूद शूटरों का सहारा लिया गया। आरोप है कि नालापानी निवासी अमन और उसके साथी विकास बलारा को इस काम के लिए लगाया गया।
20 मई की तड़के लगभग चार बजे दोनों आरोपी लक्ष्मीपुर ईस्ट होप टाउन स्थित संजय राजपूत के आवास पर पहुंचे। वहां पहले एक धमकी भरा पत्र घर के भीतर फेंका गया और उसके बाद दहशत फैलाने के उद्देश्य से फायरिंग की गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत पुलिस की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं। प्रेमनगर पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए मुख्य शूटर अमन को बिधौली क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त .315 बोर का अवैध देसी तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक और आपराधिक संबंधों की भी जांच कर रही है।
आरोपी का आपराधिक इतिहास भी लंबा
गिरफ्तार अमन के खिलाफ पहले से कई गंभीर मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ थाना डालनवाला और नेहरू कॉलोनी में हत्या के मामले दर्ज हैं, जिनमें वह करीब पांच वर्ष तक जेल में रह चुका है। इसके अलावा थाना रायपुर में एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमे दर्ज हैं।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने इस मामले में जेल में बंद अर्जुन के अलावा विकास बलारा और दीपिका को भी वांछित घोषित किया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क तथा जेल से संचालित रंगदारी गिरोह के सभी सदस्यों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी भूमि पर कथित कब्जा, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्री, बैंक ऋण तक की व्यवस्था और फिर उसी नेटवर्क के भीतर रंगदारी व फायरिंग की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह की कार्यप्रणाली की ओर इशारा करता है।
अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर करोड़ों की सरकारी जमीन के इस कथित खेल में और कितने नाम सामने आते हैं।
