देहरादून(आरएनएस)। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के आह्वान पर चरणबद्ध आंदोलन के पांचवें चरण में सोमवार को प्रदेशभर के शिक्षकों ने राजधानी में विशाल गर्जना रैली निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया। इसी के साथ टीईटी की बाध्यता खत्म करने, पुरानी पेंशन, पदोन्नति और स्थानांतरण समेत 13 सूत्रीय मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया। पुलिस ने बैरीकेडिंग लगाकर शिक्षकों को आगे जाने से रोका और पानी की बौछार की। इस दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। प्रदेश के समस्त जिलों से शिक्षक और शिक्षिकाएं सोमवार सुबह परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित हुए। यहां से सभी हाथों में तख्तियां लेकर और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बुद्धा चौक, घंटाघर, राजपुर रोड और सेंट जोसफ स्कूल चौक होते हुए सचिवालय की ओर बढ़े। शिक्षकों ने सचिवालय कूच करने के साथ अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। शिक्षक नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उनके हितों की अनदेखी न करने की अपील भी की। प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा के नेतृत्व में निकाली गई रैली में उत्तराखंड के 13 जिलों, विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षकों ने भाग लिया। रैली के दौरान प्रमुख मार्गों पर लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रही और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में शासन स्तर से वार्ता के लिए शिक्षक प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई.
रैली में यह शिक्षक रहे शामिल: गर्जना रैली में प्रदेश महामंत्री जगवीर खरोला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेश चौहान, कोषाध्यक्ष मनोज शाह, वरिष्ठ संयुक्त मंत्री सुरेश भट्ट, मिडिया प्रभारी विपिन मेहता, जिला अध्यक्ष देहरादून सूरज मंन्द्रवाल, जिला अध्यक्ष टिहरी शेर सिंह पंवार, जिला अध्यक्ष चमोली उपेंद्र सती,अध्य्क्ष अल्मोड़ा पंकज पांडेय, अध्यक्ष बागेश्वर रमेश रावत, जिला अध्यक्ष उत्तरकाशी भगत महर, जिला अध्यक्ष पौड़ी भगत भंडारी, अध्यक्ष हरिद्वार पवन सैनी, अध्यक्ष रुद्रप्रयाग लखपत लिंगवाल, अध्यक्ष उधमसिंह नगर कुंवर पाल, अध्यक्ष नैनीताल देवेंद्र कुमार, अध्य्क्ष चम्पावत रमेश देव, संगीता पंवार, शंकुतला, विजया, दुर्गा चौहान आदि शामिल रहे। आंदोलन को अखिल भारतीय शिक्षक संघ,पर्वतीय कर्मचारी संघ,मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी फेडरेशन, अधिकारी कर्मचारी, शिक्षक समन्वयक समिति, लोक निर्माण विभाग संगठन, उत्तराखंड एससी, एसटी शिक्षक संगठन का पूरा सहयोग मिला।
यह हैं प्रमुख मांगें: शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, जूनियर हाईस्कूल कैडर का पृथक संचालन, 17140 वेतनमान की वसूली से राहत, प्रारंभिक शिक्षकों की तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित करने, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण व्यवस्था लागू करने, समग्र शिक्षा का डीडीओ उप शिक्षा अधिकारियों को बनाने, प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक व अंग्रेजी शिक्षक का पद सृजित करने, पुरानी पेंशन बहाली, चयन व प्रोन्नत वेतनमान में अतिरिक्त वेतन वृद्धि, खेलकूद मद की धनराशि बढ़ाने, सीपीएड शिक्षकों के समायोजन, 5400 ग्रेड वेतन प्राप्त शिक्षकों को बोनस और गोल्डन कार्ड के तहत ओपीडी सहित निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
देहरादून : मांगों को लेकर गरजे शिक्षक, सचिवालय कूच के दौरान पुलिस से धक्का मुक्की
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