Hamarichoupal,05,05,2026
देहरादून, 5 जून। प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को आगामी 30 जून तक शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सभी प्रकार के अटैचमेंट और सम्बद्धीकरण समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न विद्यालयों, विभागीय कार्यालयों तथा अन्य विभागों में सम्बद्ध अथवा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षकों को अपने मूल विद्यालयों में लौटकर शिक्षण कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर मूल तैनाती स्थल पर न लौटने वाले शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रावत ने बताया कि अधिकांश अटैचमेंट केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए किए गए थे, लेकिन कई शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से अपने मूल विद्यालयों से दूर कार्यरत हैं। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी उत्पन्न हुई है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शिक्षणेत्तर कार्मिकों के सम्बद्धीकरण आदेश भी तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए। भविष्य में यदि किसी विशेष प्रशासनिक या शैक्षणिक आवश्यकता के तहत सम्बद्धीकरण की जरूरत होगी तो उसे निर्धारित अवधि के लिए ही स्वीकृत किया जाएगा, जिसकी अधिकतम अवधि एक शैक्षणिक सत्र होगी।
मिड-डे मील योजना में गड़बड़ियों की होगी जांच
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मिड-डे मील योजना में अनियमितताओं की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश भी जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर तथा नैनीताल के रामनगर और हल्द्वानी, पौड़ी के कोटद्वार एवं देहरादून के डोईवाला, रायपुर, विकासनगर और सहसपुर ब्लॉकों के विद्यालयों में मिड-डे मील व्यवस्था की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. रावत ने कहा कि विभिन्न माध्यमों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों से मिली शिकायतों में छात्र संख्या की तुलना में अधिक खाद्यान्न दर्शाने तथा खाद्यान्न प्राप्ति और वास्तविक खपत में अंतर जैसी गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट में यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
