HamariChoupal,14,05,2026
देहरादून(आरएनएस)। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा गुरुवार को एक मदरसे का निरीक्षण किया गया, जहाँ अनेक गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। यह कार्रवाई विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों और एक प्रतिष्ठित एनजीओ द्वारा दर्ज यौन शोषण संबंधी शिकायत के आधार पर की गई थी। निरीक्षण में पाया गया कि संस्थान में नक्शा पासिंग और अग्नि सुरक्षा मानकों का अभाव है। बच्चों को बेसमेंट में छोटे कमरों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक संख्या में रखा गया था, जो उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। अधिकांश बच्चे बिहार और अन्य राज्यों से लाए गए पाए गए, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या बहुत कम थी। बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं और उन्हें शिक्षा एवं बेहतर व्यवस्था के नाम पर यहाँ भेजा गया। आयोग की सदस्य डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों को किस प्रकार का वातावरण और शिक्षा दी जा रही है, यह गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों का उपयोग धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता। डॉ. खन्ना ने राज्य में संचालित सभी प्रकार के हॉस्टलों के लिए स्पष्ट नियमावली बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल हॉस्टलों पर लागू सुरक्षा मानक सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होने चाहिए और पंजीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए। एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों से संबंधित अपराधों में वृद्धि का कारण एक ओर रिपोर्टिंग में बढ़ोतरी है, वहीं दूसरी ओर मोबाइल और सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव भी बच्चों को असामाजिक गतिविधियों की ओर प्रेरित कर रहा है। उन्होंने समाज में बढ़ती राजनीतिक कटुता, रंजिश, घटती नैतिकता और टूटते पारिवारिक संबंधों को भी अपराधों के प्रमुख कारण बताया।हाल ही में चंपावत में राजनीतिक रंजिश के चलते नाबालिग बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की घटना को उन्होंने अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि कोई भी व्यक्ति ऐसे वीडियो को साझा न करे और यदि प्राप्त हो तो तुरंत डिलीट कर दें, ताकि बच्ची की पहचान और सम्मान सुरक्षित रह सके।आयोग ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभागों और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी और आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।
