देहरादून। प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई के साथ जागरूकता और प्रशिक्षण पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पुलिस लाइन देहरादून में नशे के खिलाफ प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें एडीजी वी. मुरुगेशन ने नशे की तस्करी को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि नशे के अवैध कारोबार का बड़ा हिस्सा अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उनके मुताबिक, केवल 10 प्रतिशत नशा ही पकड़ा जा रहा है, जबकि 90 प्रतिशत तस्कर अब भी बाहर घूम रहे हैं।
एडीजी ने कहा कि नशे की तस्करी अब केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देश युद्ध में जीत हासिल नहीं कर पाने पर नशे के जरिए हमला करने की रणनीति अपना रहे हैं। ड्रोन और समुद्री मार्गों से नशीले पदार्थों की सप्लाई की जा रही है। ऐसे में तस्करी के नेटवर्क की पहचान करना और उसे पूरी तरह ध्वस्त करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
एडीजी वी. मुरुगेशन ने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब तक तस्करी के पूरे नेटवर्क को नहीं तोड़ा जाएगा और नशे की मांग कम नहीं होगी, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के साथ युवाओं को नशे से दूर रखने की रणनीति पर भी काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना, परिवारों को सतर्क रखना और नशे की लत में फंसे लोगों को इससे बाहर निकालने के प्रयास करना समय की जरूरत है। सामूहिक प्रयासों से ही नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रदेश में नशे के खिलाफ की गई कार्रवाई के आंकड़े भी सामने रखे गए। वर्ष 2024 में उत्तराखंड में 76 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे। वहीं, वर्ष 2026 में सितंबर तक 46 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ पकड़े जा चुके हैं। ये आंकड़े पुलिस की कार्रवाई के साथ नशे के अवैध कारोबार की गंभीरता को भी दर्शाते हैं।
प्रशिक्षण शिविर से पहले ‘नशामुक्त देवभूमि, मेरी शुरुआत खुद से’ अभियान के तहत बाइक रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने और उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित करना है।
90 फीसदी नशा तस्कर पुलिस की पकड़ से बाहर, केवल 10 प्रतिशत नशा ही पकड़ा जा रहा: एडीजी
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