अनुराग गुप्ता
उत्तराखंड में सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत पहले से ही ठेकेदारों की कमर तोड़ रही है, और अब रॉयल्टी के अतिरिक्त लगाई जा रही पेनल्टी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े ठेकेदारों के संगठन ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सचिव खनन एवं औद्योगिक विकास को मांगपत्र सौंपा है।
ठेकेदारों का सवाल है कि जब निर्माण सामग्री पर रॉयल्टी का प्रावधान पहले से मौजूद है, तो नियमों के तहत सामग्री इस्तेमाल करने वाले ठेकेदारों पर अतिरिक्त पेनल्टी आखिर किस आधार पर लगाई जा रही है? क्या विभाग के पास इस कार्रवाई का स्पष्ट आधार है?
वीओ: पीएमजीएसवाई ठेकेदार एसोसिएशन ने रॉयल्टी के अलावा पेनल्टी लगाने के आदेशों पर विरोध जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश चंद्र गहतौड़ी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि ठेकेदारों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
एसोसिएशन ने पेनल्टी के आदेश वापस लेने, डामर की दरों में संशोधन करने और ठेकेदारों की लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग उठाई है।
मामला सिर्फ पेनल्टी तक सीमित नहीं है। ठेकेदारों ने जिला खनिज न्यास और डीएमएफ से काटी जाने वाली धनराशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों में होने वाली क्षति की भरपाई का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है, तो ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आधार क्या है? क्या संबंधित विभाग ठेकेदारों की आपत्तियों का स्पष्ट जवाब देगा, या यह विवाद यूं ही चलता रहेगा?
हमारी चौपाल की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।
