हमारी चौपाल
अनुराग गुप्ता
देहरादून, 03 जुलाई। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए ऋषिकेश में बिना स्वीकृत मानचित्र के बनाए जा रहे एक भवन को सील कर दिया। वहीं देहरादून के राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी और आसपास के क्षेत्रों में निर्माणाधीन भवनों का निरीक्षण कर नियमों का उल्लंघन करने वालों को चेतावनी दी गई तथा नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान के तहत ऋषिकेश के निर्मल ब्लॉक-बी, द गंगाज के निकट स्थित भवन में बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य पाया गया। निरीक्षण के बाद प्राधिकरण की टीम ने भवन को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहा।
इसके अलावा संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के नेतृत्व में राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निर्माणाधीन भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्वीकृत मानचित्रों का वास्तविक निर्माण से मिलान किया गया। कई निर्माणकर्ताओं से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, जबकि मानचित्र के विपरीत निर्माण पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए।
संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने कहा कि बिना अनुमति या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए जा रहे निर्माणों के खिलाफ उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान में क्षेत्रीय अवर अभियंता सचिन तोमर, सिद्धार्थ सेमवाल, विदिता कुमारी, पवन भट्ट सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने भवन स्वामियों और निर्माणकर्ताओं से अपील की कि निर्माण शुरू करने से पहले सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही निर्माण कराएं।
प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि पूरे विकास क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। बिना स्वीकृति के भवन निर्माण और मानचित्र के विपरीत किए जा रहे कार्यों के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने नागरिकों से भवन निर्माण से पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां लेने की अपील की, ताकि कानूनी कार्रवाई से बचते हुए क्षेत्र का सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
