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HamariChoupal,27,06,2026
देहरादून। आसन कंजर्वेशन रिजर्व एवं उससे सटे आरक्षित वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन के मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी (कालसी) ने रामपुरमंडी बीट की वन आरक्षी को भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत 24 घंटे के भीतर वन अपराध (H-2 Case) पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अब कार्रवाई में किसी प्रकार की देरी या टालमटोल स्वीकार नहीं की जाएगी।
जारी आदेश के अनुसार 6 जून 2026 को किए गए विभागीय निरीक्षण, जीपीएस आधारित स्थल अभिलेखों तथा जियो-टैग्ड फोटोग्राफ के आधार पर ट्रक संख्या PB-13B-S0962 को आरक्षित वन क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रूप से बनाए गए मार्ग से प्रवेश करते हुए तथा वहां से खनिज परिवहन करते हुए दर्ज किया गया है। विभाग का दावा है कि उक्त ट्रक उस अवैध आरबीएम (River Bed Material) भंडारण केंद्र के प्रवेश मार्ग से वन क्षेत्र में पहुंचा, जिसे पूर्व में वन विभाग द्वारा जब्त कर सील किया जा चुका था।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित वन आरक्षी इस पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्ष साक्षी रही हैं। साथ ही विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट, जीपीएस लोकेशन, जियो-टैग्ड फोटोग्राफ और अन्य उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों के मद्देनजर अब साक्ष्य के अभाव का कोई आधार शेष नहीं रह गया है। इसी आधार पर तत्काल वन अपराध दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उप प्रभागीय वनाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ट्रक चालक, वाहन स्वामी तथा कम्पनी सहित जांच में उत्तरदायी पाए जाने वाले अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के तहत तत्काल H-2 वन अपराध दर्ज किया जाए। साथ ही कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद वन अपराध दर्ज नहीं किया जाता है अथवा कार्रवाई में अनावश्यक विलंब किया जाता है तो इसे संबंधित अधिकारी द्वारा वैधानिक कर्तव्यों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की जाएगी। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए विभाग ने कहा है कि आसन कंजर्वेशन रिजर्व उत्तराखंड का एकमात्र रामसर स्थल (Ramsar Site) है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक दृष्टि से विशेष पहचान है। इसके 10 किलोमीटर के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (Eco Sensitive Zone-ESZ) में खनन गतिविधियों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उत्तराखंड उच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं। ऐसे में इन न्यायिक आदेशों का अक्षरशः पालन कराना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है।
वन विभाग ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम दायित्व, दोष अथवा किसी व्यक्ति या संस्था की जवाबदेही का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय द्वारा विधि के अनुसार किया जाएगा।
वन विभाग की इस कार्रवाई को आसन कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में कथित अवैध खनन और खनिज परिवहन के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 24 घंटे की समयसीमा के भीतर H-2 केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई किस प्रकार अमल में लाई जाती है।
जारी आदेश के अनुसार 6 जून 2026 को किए गए विभागीय निरीक्षण, जीपीएस आधारित स्थल अभिलेखों तथा जियो-टैग्ड फोटोग्राफ के आधार पर ट्रक संख्या PB-13B-S0962 को आरक्षित वन क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रूप से बनाए गए मार्ग से प्रवेश करते हुए तथा वहां से खनिज परिवहन करते हुए दर्ज किया गया है। विभाग का दावा है कि उक्त ट्रक उस अवैध आरबीएम (River Bed Material) भंडारण केंद्र के प्रवेश मार्ग से वन क्षेत्र में पहुंचा, जिसे पूर्व में वन विभाग द्वारा जब्त कर सील किया जा चुका था।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित वन आरक्षी इस पूरे घटनाक्रम की प्रत्यक्ष साक्षी रही हैं। साथ ही विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट, जीपीएस लोकेशन, जियो-टैग्ड फोटोग्राफ और अन्य उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों के मद्देनजर अब साक्ष्य के अभाव का कोई आधार शेष नहीं रह गया है। इसी आधार पर तत्काल वन अपराध दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उप प्रभागीय वनाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ट्रक चालक, वाहन स्वामी तथा कम्पनी सहित जांच में उत्तरदायी पाए जाने वाले अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों के तहत तत्काल H-2 वन अपराध दर्ज किया जाए। साथ ही कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद वन अपराध दर्ज नहीं किया जाता है अथवा कार्रवाई में अनावश्यक विलंब किया जाता है तो इसे संबंधित अधिकारी द्वारा वैधानिक कर्तव्यों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की जाएगी। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए विभाग ने कहा है कि आसन कंजर्वेशन रिजर्व उत्तराखंड का एकमात्र रामसर स्थल (Ramsar Site) है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक दृष्टि से विशेष पहचान है। इसके 10 किलोमीटर के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (Eco Sensitive Zone-ESZ) में खनन गतिविधियों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उत्तराखंड उच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं। ऐसे में इन न्यायिक आदेशों का अक्षरशः पालन कराना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है।
वन विभाग ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम दायित्व, दोष अथवा किसी व्यक्ति या संस्था की जवाबदेही का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय द्वारा विधि के अनुसार किया जाएगा।

वन विभाग की इस कार्रवाई को आसन कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में कथित अवैध खनन और खनिज परिवहन के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 24 घंटे की समयसीमा के भीतर H-2 केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई किस प्रकार अमल में लाई जाती है।

