देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की एसआईआर समिति ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम काटने के प्रयास हुए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हजारों फॉर्म-7 संदिग्ध तरीके से लगाए गए और अंतिम चरण में करीब 97 हजार मतदाताओं के नाम स्वत: सृजित फॉर्म-7 के आधार पर मतदाता सूची से हटा दिए गए।
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल रही और इससे पात्र मतदाताओं को परेशान होना पड़ा। पार्टी ने दावा किया कि उसके बीएलए-1 और बीएलए-2 ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की कोशिशों की पहचान की और नियमों के तहत आपत्तियां दर्ज कराईं।
हजारों फॉर्म-7 पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
मनोज रावत के अनुसार, 26-27 जुलाई से दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पात्र मतदाताओं के नाम काटने के लिए असामान्य संख्या में फॉर्म-7 सामने आए। 13 अगस्त तक इनकी संख्या हजारों में पहुंच गई थी। कांग्रेस का दावा है कि एक आपत्तिकर्ता ने अकेले करीब 6500 फॉर्म-7 लगाए थे, जबकि प्रदेश में ऐसे सैकड़ों फॉर्म भरने वाले कई आपत्तिकर्ता सामने आए।
कांग्रेस के मुताबिक, उसके 70 बीएलए-1 और करीब 11,600 बीएलए-2 कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की 30 विधानसभा सीटों में फॉर्म-7 की जांच की। पार्टी ने आरोप लगाया कि गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े और कम पढ़े-लिखे मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
फर्जी या संदिग्ध फॉर्म-7 सामने आने के बाद कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारियों और विधानसभा स्तर पर ईआरओ के समक्ष प्रत्येक मामले में नियमों के तहत सुनवाई की मांग की।
झबरेड़ा में करीब 40 आपत्तिकर्ताओं के शपथपत्र का दावा
कांग्रेस ने झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि भाजपा से जुड़े करीब 40 आपत्तिकर्ताओं, जिनमें अधिकांश बीएलए बताए गए, ने ईआरओ के समक्ष शपथपत्र देकर कहा कि फॉर्म-7 की आपत्तियां उनके नाम से लगाई गईं, लेकिन उन्होंने स्वयं ये आवेदन नहीं किए थे।
कांग्रेस का आरोप है कि कुछ फॉर्म पहले से तैयार कर विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भेजे गए थे। पार्टी ने कहा कि फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 में गलत सूचना देना कानूनी अपराध है और वह ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की संभावना पर विचार कर रही है।
96,704 फॉर्म-7 में से 7,523 नाम ही हटे: कांग्रेस
कांग्रेस के अनुसार, अंतिम आंकड़ों में 96,704 आपत्तिकर्ताओं ने फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। पार्टी का दावा है कि उसके विरोध और कानूनी अभियान के बाद इनमें से केवल 7,523 मतदाताओं के नाम ही हटाए जा सके।
कांग्रेस ने कहा कि इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की थी, जिनमें स्वयं मतदाता या उसके परिजन ने किसी बूथ से नाम हटाने के लिए आवेदन किया था। पार्टी ने इन मामलों की भी जांच किए जाने की बात कही है।
97,186 मतदाताओं को नोटिस, जवाब नहीं देने पर नाम हटाने का आरोप
कांग्रेस ने एसआईआर के सबसे गंभीर पहलुओं में से एक के रूप में उन मतदाताओं का मामला उठाया है, जिन्हें चुनाव आयोग के सिस्टम से तार्किक विसंगतियों और ‘नॉट मैप्ड’ से संबंधित नोटिस भेजे गए थे।
मनोज रावत के अनुसार, ड्राफ्ट सूची में शामिल करीब 24.30 लाख मतदाताओं को इस तरह के नोटिस दिए गए। इनमें से करीब 97,186 मतदाताओं ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। कांग्रेस का आरोप है कि इन मतदाताओं को ‘इनएलिजिबल’ मानते हुए सिस्टम से उनके खिलाफ स्वत: फॉर्म-7 तैयार कर दिए गए और अंतिम सूची में उनके नाम हटा दिए गए।
कांग्रेस का सवाल है कि यदि किसी मतदाता को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का अवसर नहीं मिला तो केवल सिस्टम द्वारा तैयार प्रक्रिया के आधार पर उसका नाम कैसे हटाया जा सकता है।
हरिद्वार ग्रामीण में 123 नामों का मामला उठाया
कांग्रेस ने 28 सितंबर को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 65, सराय का मामला भी उठाया। पार्टी के मुताबिक, वहां मतदाता सूची से हटाए गए 123 मतदाताओं की बीएलए-1 और बीएलए-2 के माध्यम से जांच कराई गई।
कांग्रेस का दावा है कि जांच में ये सभी मतदाता उसी बूथ क्षेत्र में मौजूद पाए गए और उन्होंने बीएलओ को अपने दस्तावेज भी उपलब्ध कराए थे। पार्टी के अनुसार, बीएलए-2 ने बताया कि बीएलओ ने संबंधित प्रमाणपत्र सिस्टम में अपलोड भी किए थे।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि दस्तावेज अपलोड किए जा चुके थे तो इन मतदाताओं के नाम सिस्टम से किस स्तर पर हटाए गए। पार्टी ने दावा किया कि 28 सितंबर के बाद हरिद्वार ग्रामीण में करीब चार हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। कांग्रेस का कहना है कि इसी तरह के मामले प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी सामने आए हैं।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
कांग्रेस एसआईआर समिति ने स्वत: सृजित फॉर्म-7 की प्रक्रिया को निर्वाचक नियमावली के विपरीत बताते हुए चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित ईआरओ को शिकायत भेजने की बात कही है।
मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस जल्द ही इस मामले को उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष ले जाने पर विचार कर रही है।
13.89 लाख मतदाताओं की कमी पर भी सवाल
कांग्रेस ने उत्तराखंड की मतदाता संख्या में पिछले डेढ़-दो वर्षों में आए कथित बड़े बदलाव को भी सवालों के घेरे में रखा है। समिति के अनुसार, छह जनवरी 2025 को प्रदेश में कुल 85,19,271 मतदाता थे।
कांग्रेस का दावा है कि प्री-एसआईआर और एसआईआर की विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान करीब 13.89 लाख सामान्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे हैं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि 29 मई 2026 को एसआईआर शुरू होने से पहले सॉफ्टवेयर के माध्यम से हटाए गए 4,53,459 कथित दोहरे मतदाताओं का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस ने तीन अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद सामान्य और सर्विस मतदाताओं की कुल संख्या करीब 72.5 लाख रहने का दावा किया है। पार्टी का तर्क है कि इतनी संख्या करीब 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों के आसपास रही मतदाता संख्या के बराबर है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब सामान्य परिस्थितियों में आबादी और मतदाताओं की संख्या में वृद्धि होती है तो केवल कुछ महीनों में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई। पार्टी ने कहा कि या तो पिछले वर्षों में मतदाता संख्या बढ़ने की प्रक्रिया में गड़बड़ी थी या एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए।
फॉर्म-6 से नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति
कांग्रेस ने एसआईआर के बाद फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने के अभियान पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से संबंधित घोषणा करनी होती है। ऐसे में जिस व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में था और बाद में गलत तरीके से काट दिया गया, उसके लिए फॉर्म-6 भरकर स्वयं को पहली बार मतदाता बताना कानूनी रूप से पेचीदा स्थिति पैदा कर सकता है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस स्थिति में गलत तरीके से नाम काटे जाने की कथित गलती का खामियाजा भी मतदाता को भुगतना पड़ सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान लगातार चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका आरोप है कि फर्जी या संदिग्ध फॉर्म-7 के इस्तेमाल को रोकने तथा ऐसे आवेदन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि कई मौकों पर उसे ऐसा लगा कि प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारी भी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया को रोकने के बजाय उसका हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दोहरे मतदाताओं के मुद्दे पर भी घेरा
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची के डुप्लीकेशन हटाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के बावजूद दोहरे मतदाताओं की पहचान और उन्हें सूची से हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं रही।
कांग्रेस ने दावा किया कि पार्टी ने चुनाव आयोग के साथ हुई बैठकों में प्रदेश के सभी दोहरे मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की, लेकिन यह मांग पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
बीएलओ और राज्य के अधिकारियों की कांग्रेस ने की सराहना
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना के बीच कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले बीएलओ, कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यकुशलता की सराहना भी की।
मनोज रावत ने कहा कि विशेष रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बीएलओ के रूप में एसआईआर जैसी तकनीकी प्रक्रिया को कुशलता से पूरा किया। उन्होंने इसे उत्तराखंड की मातृशक्ति की बढ़ती क्षमता और कार्यकुशलता का उदाहरण बताया।
कांग्रेस ने राज्य के निर्वाचन अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के प्रयासों की भी सराहना की। पार्टी का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा दिल्ली से नियंत्रित होने के कारण राज्य स्तर के अधिकारी भी कई मामलों में सीमित भूमिका में रहे।
चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर निष्कर्ष का दावा
कांग्रेस एसआईआर समिति ने कहा कि उत्तराखंड में एसआईआर की जमीनी प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद पार्टी इसे अनावश्यक, मतदाताओं को परेशान करने वाली और पात्र मतदाताओं के नाम काटने की आशंका पैदा करने वाली प्रक्रिया मानती है।
पार्टी ने पिछले वर्षों में मतदाता संख्या में आए उतार-चढ़ाव को आधार बनाते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने यहां तक कहा है कि यदि एसआईआर के दौरान सामने आई अनियमितताएं सही पाई जाती हैं तो देशभर की एसआईआर प्रक्रिया और उसके बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर चुनाव आयोग अथवा संबंधित निर्वाचन अधिकारियों का पक्ष इस प्रेस नोट में उपलब्ध नहीं है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक होगी।
एसआईआर को कांग्रेस ने बताया ‘वोट काटने की साजिश’, 97 हजार मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल
मनोज रावत बोले- फॉर्म-7 के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम काटने का प्रयास, झबरेड़ा में भाजपा के करीब 40 आपत्तिकर्ताओं ने शपथपत्र देकर जताई अनभिज्ञता
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