देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को एफआरआई कैंपस देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने वन्यजीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने वाले 18 लोगों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित लोगों को 51-51 हजार रुपये की धनराशि देने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉलों और वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही वन्यजीव विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान की जाए और वहां की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। इस दिशा में तेजी से कार्य किया जाएगा, ताकि यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
जंगल सुरक्षित और वन्यजीवों के रास्ते खुले रखना सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। सनातन संस्कृति में मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित रहें और उनके प्राकृतिक कॉरिडोर खुले रहें। विकास परियोजनाओं के साथ वन्यजीवों की सुविधा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इसका उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हिमालय, घने जंगलों, नदियों, झीलों और समृद्ध जैव-विविधता से संपन्न है। राज्य की सबसे बड़ी पूंजी इसकी प्राकृतिक संपदा है। जिम कॉर्बेट और राजाजी जैसे राष्ट्रीय उद्यान प्रदेश की पहचान हैं, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। सरकार प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है, ताकि जंगल सुरक्षित रहने के साथ इको-टूरिज्म और होमस्टे जैसी गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े।
कॉर्बेट से राजाजी में बाघों के पुनर्स्थापन का दूसरा चरण जल्द
मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण भी शुरू होने जा रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जंगलों की निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।
वन्यजीव हमले में मृत्यु पर अब 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित नागरिकों की सहायता करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया है। वहीं वन्यजीव हमले में घायल नागरिकों के इलाज का खर्च भी अब राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
उन्होंने वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार एक लाख युवाओं को ‘सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके तहत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म से जुड़े कौशल को रोजगार एवं उद्यम से जोड़ा जा रहा है।
विद्यार्थियों को वन्यजीवों से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन LiFE का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राज्य में जीईपी के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन का कार्य भी किया जा रहा है।
वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें पर्यटक : धामी
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से अपील की कि जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान अथवा धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान गंदगी न फैलाएं, प्लास्टिक न छोड़ें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण सबकी सामूहिक जिम्मेदारी : सुबोध उनियाल
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ वन भूमि भी है और यहां 71 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन भूमि है। राज्यवासियों की आजीविका में भी वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव प्रकृति के साथ-साथ रोजगार के लिए भी जरूरी हैं और उनकी सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह की थीम “जुड़े आवास-वन्य जीवन का विकास” है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विभिन्न वन्यजीव कॉरिडोर के निर्माण पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनकी आजादी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी आमजन की सुरक्षा। सरकार वनों को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने के साथ ही विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है।
कार्यक्रम में विधायक श्रीमती सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल सहित वन विभाग के अधिकारी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
वन्यजीव संघर्ष में साहस दिखाने वाले 18 लोगों को 51-51 हजार रुपये देगी सरकार
मुख्यमंत्री धामी ने एफआरआई में वन्यजीव सप्ताह-2026 का किया शुभारंभ, वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर जोर
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