देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल ने धामी सरकार द्वारा अदाणी पावर से 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली 25 वर्षों तक ₹5.746 प्रति यूनिट की दर से खरीदने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। UKD के केंद्रीय महामंत्री राजेंद्र सिंह बिष्ट ने इस करार को उत्तराखंड के दीर्घकालीन हितों के संदर्भ में सवालों के घेरे में बताते हुए पूरे टेंडर और समझौते को सार्वजनिक करने की मांग की है।
राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रस्तावित बिजली छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाले संयंत्र से उत्तराखंड को उपलब्ध कराई जाएगी। उनके अनुसार, यदि 1320 मेगावाट बिजली की 25 वर्षों तक लगातार 24 घंटे की क्षमता के आधार पर गणना की जाए तो इसकी अनुमानित राशि करीब ₹1.66 लाख करोड़ बैठती है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी दीर्घकालीन वित्तीय प्रतिबद्धता के प्रत्येक पहलू की सार्वजनिक जांच और पारदर्शिता जरूरी है।
UJVNL-THDC की पहल क्यों बदली गई?
UKD नेता ने सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से 1320 मेगावाट की परियोजना विकसित करने की पहल की गई थी, तो बाद में उस सार्वजनिक क्षेत्र की व्यवस्था को क्यों बदला गया। इसके बाद UPCL द्वारा नया टेंडर जारी किए जाने और अब अदाणी पावर के साथ करार किए जाने की प्रक्रिया पर भी उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा।
बिष्ट ने पूछा कि यदि परियोजना उत्तराखंड में स्थापित नहीं हो रही है तो इसे छत्तीसगढ़ में लगाने का निर्णय क्यों लिया गया? छत्तीसगढ़ से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने में आने वाली ट्रांसमिशन तथा अन्य अतिरिक्त लागत का भार किस पर पड़ेगा और ₹5.746 प्रति यूनिट की दर में फिक्स्ड चार्ज, ऊर्जा शुल्क, ट्रांसमिशन और अन्य खर्चों का वास्तविक विभाजन क्या है?
‘84 शर्तों में बदलाव की हो स्वतंत्र जांच’
राजेंद्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में 86 में से 84 निविदा शर्तों में बदलाव किए गए। उन्होंने सरकार से मूल और संशोधित दोनों टेंडर दस्तावेज तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि इन बदलावों से निविदा की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 1320 मेगावाट की परियोजना उत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से विकसित होती तो राज्य को स्थानीय रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण, निर्माण कार्य और आर्थिक गतिविधियों के कितने अवसर मिल सकते थे।
‘जनता को पूरे सौदे का हिसाब जानने का अधिकार’
UKD नेता ने कहा कि उत्तराखंड केवल बिजली खरीदने वाला राज्य नहीं, बल्कि देश के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में 25 वर्षों की इतनी बड़ी बिजली खरीद प्रतिबद्धता से जुड़े प्रत्येक वित्तीय पहलू की जानकारी जनता के सामने होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि 1320 मेगावाट बिजली करार से संबंधित पूरा टेंडर, सभी मूल एवं संशोधित शर्तें, पावर सप्लाई एग्रीमेंट, टैरिफ गणना, ट्रांसमिशन लागत और 25 वर्षों की अनुमानित कुल वित्तीय देनदारी सार्वजनिक की जाए।
राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह व्यवस्था उत्तराखंड के दीर्घकालीन हितों में किस प्रकार लाभकारी है। साथ ही उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
1320 मेगावाट बिजली करार पर UKD का वार: ‘उत्तराखंड के हित में सौदा या निजी कंपनी के फायदे का रास्ता?’
25 साल की बिजली खरीद पर उठाए सवाल, टेंडर की 84 शर्तों में बदलाव की स्वतंत्र जांच की मांग
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