देहरादून। केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के तहत देहरादून में 17 और 18 अगस्त को बद्रीपुर एवं शेरपुर में जागरूकता और फील्ड डे कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोनों कार्यक्रमों में 70 से अधिक किसानों एवं रेशमकीट पालकों ने भाग लेकर वैज्ञानिक रेशम उत्पादन की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
17 अगस्त को चावकी रियरिंग सेंटर (सीआरसी), बद्रीपुर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक-डी डॉ. सहदेव चौहान, वैज्ञानिक-सी एवं अभियान के नोडल अधिकारी श्री अभिषेक सिंह, श्री राजीव चौहान, ग्राम प्रधान सहित केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं रेशम निदेशालय, उत्तराखण्ड के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
वहीं, 18 अगस्त को शेरपुर में आयोजित फील्ड डे कार्यक्रम में किसानों एवं रेशमकीट पालकों को रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं पर चर्चा की तथा उनके सवालों का समाधान किया।
कार्यक्रम में उन्नत रेशमकीट नस्लों, शहतूत की वैज्ञानिक खेती, अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक रेशमकीट पालन, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, पालन गृह की स्वच्छता एवं कीटाणुशोधन तथा जलवायु-अनुकूल रेशम उत्पादन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। फील्ड डे के दौरान किसानों को तकनीकों के व्यवहारिक उपयोग और प्रभावी अनुप्रयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया।
अधिकारियों ने ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 1.0’ के तहत पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त किसानों से भी फीडबैक लिया। किसानों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर तकनीकी हस्तांतरण गतिविधियों एवं जिला स्तरीय कार्ययोजना को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य देहरादून में वैज्ञानिक, टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल रेशमकीट पालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की तकनीकी क्षमता और आय में वृद्धि करना रहा। किसानों की सक्रिय भागीदारी से दोनों कार्यक्रम सफल रहे।
बद्रीपुर और शेरपुर में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ अभियान के तहत जागरूकता व फील्ड डे कार्यक्रम
70 से अधिक किसानों एवं रेशमकीट पालकों ने लिया भाग, वैज्ञानिक तकनीकों की दी गई जानकारी
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