देहरादून, 29 जुलाई।
देहरादून महायोजना-2041 को अधिक जनोन्मुख और व्यवहारिक बनाने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से आयोजित दूसरे चरण की जनसुनवाई में दूसरे दिन भी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशनों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने शहर के भविष्य को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।
एमडीडीए के अनुसार दूसरे दिन कुल 28 आपत्तियां एवं सुझाव प्राप्त हुए। इनमें सड़क नेटवर्क, यातायात प्रबंधन, भूमि उपयोग, पार्किंग, जल निकासी व्यवस्था, हरित क्षेत्रों का संरक्षण तथा आवासीय एवं व्यावसायिक विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
प्राधिकरण का कहना है कि महायोजना-2041 केवल विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में देहरादून के सुनियोजित विकास का रोडमैप है। इसलिए प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का नियोजन विशेषज्ञों एवं तकनीकी अधिकारियों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। जो सुझाव जनहित, नियमों और व्यवहारिकता के अनुरूप होंगे, उन्हें अंतिम महायोजना में शामिल किया जाएगा।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि जनसहभागिता ही महायोजना की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य ऐसा विजन डॉक्यूमेंट तैयार करना है जो वर्तमान आवश्यकताओं के साथ भविष्य की चुनौतियों का भी समाधान प्रस्तुत करे।
वहीं, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि सभी सुझावों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जा रहा है और प्रत्येक सुझाव का निष्पक्ष एवं तकनीकी परीक्षण कर उपयुक्त प्रस्तावों को अंतिम प्रारूप में शामिल किया जाएगा। उनका कहना है कि महायोजना-2041 व्यापक जनभागीदारी और गुणवत्तापूर्ण शहरी नियोजन का आदर्श दस्तावेज बनेगी।
देहरादून का भविष्य लिखने उमड़ी जनता, महायोजना-2041 पर दूसरे दिन भी सुझावों की बौछार
दूसरे चरण की जनसुनवाई में 28 आपत्तियां और सुझाव दर्ज, सड़क, पार्किंग, ट्रैफिक और हरित क्षेत्रों पर नागरिकों ने रखी बेबाक राय
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