हमारी चौपाल
देहरादून, 4 जुलाई। विद्यालयी शिक्षा विभाग में मेडिकल प्रमाणपत्र के आधार पर तबादला चाहने वाले शिक्षकों का अब दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने निदेशालय स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के जरिए स्थानांतरण कराने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि मेडिकल बोर्ड शिक्षकों के साथ-साथ उनके उन परिजनों के स्वास्थ्य दावों की भी जांच करेगा, जिनके नाम पर गंभीर बीमारी का हवाला देकर स्थानांतरण का आवेदन किया गया है। यदि जांच में प्रमाणपत्र फर्जी या भ्रामक पाए गए तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वास्तव में गंभीर बीमारी से पीड़ित या शारीरिक रूप से अपने दायित्व निभाने में असमर्थ शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके लिए सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार कर निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
डाॅ. रावत ने बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा कि पूर्व वर्षों में फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के आधार पर पसंदीदा स्थानों पर तबादले कराने की शिकायतें मिली थीं, जिन पर अब सख्ती से रोक लगाई जाएगी।
55 दिन का मिला अतिरिक्त समय
शिक्षा मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी के बाद शिक्षा विभाग को शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए 55 दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है। जल्द ही ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे और रिक्त पदों के अनुसार शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे।
