Hamarichoupal,28,05,2026
भारत में हर साल 1 लाख+ नए ब्लड कैंसर केस और 70,000+ मौतें होती हैं। 70% मरीजों को गैर-संबंधी डोनर से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट चाहिए, लेकिन देश की आबादी का सिर्फ 0.09% ही रजिस्टर्ड डोनर है।
1. *देर से निदान* – मरीज लक्षणों को वायरल, एनीमिया समझकर महीनों बर्बाद करते हैं
2. *डोनर की कमी* – मैच ज्यादातर एक जैसी जातीयता में मिलता है, पर रजिस्ट्री में विविधता नहीं
3. *जागरूकता की कमी* – लोग सोचते हैं डोनेशन में चीर-फाड़ या दर्द होता है, जबकि 90% केस में ये ब्लड डोनेशन जैसा आसान है
– *डॉ. ईशा कौल, मेदांता नोएडा*: “कुछ महीनों की देरी भी मरीज की जान ले सकती है। रजिस्ट्री बढ़ाना जरूरी।”
– *पैट्रिक पॉल, डीकेएमएस फाउंडेशन*: “युवा, कॉलेज, कंपनियों को आगे आना होगा।”
– *डॉ. अरुणा राजेंद्रन, चेन्नई*: “कैंसर के डर से लोग जांच टालते हैं। समय पर रेफर करना जरूरी।”
– *डॉ. नितिन अग्रवाल, डीकेएमएस*: “18-35 साल के युवा डोनर पूल बढ़ा सकते हैं। ये पूरी तरह सुरक्षित है।”
ट्रांसप्लांट तकनीक बेहतर होने से बड़े अस्पतालों में सफलता दर बढ़ी है। डीकेएमएस ने 2019 से 2.8 लाख डोनर रजिस्टर किए और 250+ मरीजों की मदद की।
*डोनर कौन बन सकता है?*
– उम्र: 18-55 साल
– स्वस्थ व्यक्ति
– रजिस्ट्रेशन: गाल का स्वैब + फॉर्म। कोई सर्जरी नहीं
*रजिस्टर कैसे करें:*
https://www.dkms-india.org/register-now पर जाकर फ्री होम स्वैब किट मंगाएं।
*शहर vs गांव का अंतर:*
बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली में जागरूकता ज्यादा है। टियर-2/3 शहरों और गांवों में रजिस्ट्रेशन बहुत कम।
*संपर्क*: विकास कुमार – 8057409636
विश्व ब्लड कैंसर दिवस 28 मई से पहले ये अलर्ट जारी किया गया है।
क्या इस प्रेस रिलीज को छोटा करके सोशल मीडिया पोस्ट बनाऊं या किसी खास पॉइंट पर फोकस करूं?
