Hamarichoupal,21,05,2026
जमीनी धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे सुनकर प्रशासनिक अमला भी हैरान है। यहां तिहाड़ जेल में बंद एक व्यक्ति की मौत होने के करीब ढाई महीने बाद उसकी करोड़ों रुपये की 24 बीघा कीमती जमीन को फर्जी तरीके से दूसरे के नाम रजिस्ट्री (बैनामा) करा दिया गया। मामले का खुलासा होने के बाद शिकायतकर्ता ने देहरादून एसएसपी से मिलकर इस महाफर्जीवाड़े के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मौजा बड़ोंवाला स्थित खसरा नंबर 233 क, 235 ख, 237 क, 245, 302, 306, और 309 ड की लगभग 24 बीघा भूमि का एक बैनामा गत 06 नवंबर 2024 को उपनिबंधक कार्यालय में दर्ज किया गया। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस भूमि का विक्रेता निर्मल सिंह पुत्र गुरदयाल सिंह (निवासी दिल्ली) को दिखाया गया है, जबकि जमीन खरीदने वाला (क्रेता) आशीष राठौर पुत्र सुभाष चंद्र राठौर (निवासी बरोटीवाला, पोस्ट पृथ्वीपुर खेड़ा, तहसील विकासनगर) है।
अगस्त में हुई मौत, नवंबर में अंगूठा!
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब जमीन के असल मालिक निर्मल सिंह के रिकॉर्ड खंगाले गए। शिकायतकर्ता राजीव ने साक्ष्यों के साथ खुलासा किया कि विक्रेता निर्मल सिंह दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। जेल में रहते हुए ही 25 अगस्त 2024 को उनकी मृत्यु हो गई थी, जिसका बाकायदा आधिकारिक डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी जारी हो चुका है।
बड़ा सवाल: जब निर्मल सिंह की मौत 25 अगस्त 2024 को हो चुकी थी, तो ढाई महीने बाद यानी 6 नवंबर 2024 को उपनिबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री करने कौन पहुंचा? मृतक के स्थान पर किस फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर फोटो खिंचवाई गई और अंगूठे के निशान लगवाए गए
भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत की आशंका
शिकायतकर्ता राजीव का आरोप है कि इतने बड़े सुनियोजित फर्जीवाड़े को बिना किसी बड़े गठजोड़ के अंजाम नहीं दिया जा सकता। इसमें किसी व्यक्ति को खड़ा कर और फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री विभाग की आंखों में धूल झोंकी गई है। आशंका जताई जा रही है कि इस खेल में कई सफेदपोश और प्रॉपर्टी डीलर भी शामिल हो सकते हैं।
एसएसपी देहरादून के दरबार पहुंचेगा मामला
शिकायतकर्ता राजीव ने बताया कि इस महाफर्जीवाड़े के सारे पुख्ता सबूत और मृतक का डेथ सर्टिफिकेट जुटा लिया गया है। जल्द ही इस पूरे मामले की लिखित शिकायत एसएसपी देहरादून को सौंपी जाएगी। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए, ताकि रजिस्ट्री कराने वाले मुख्य आरोपी और फर्जी विक्रेता बने व्यक्ति समेत इसमें शामिल सभी चेहरों को बेनकाब कर जेल भेजा जा सके।
