HamariChoupal,08,03,2026
मदन मोहन पांडे
उत्तराखंड में बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह सरकार की नीतियों, विकास की दिशा और राजनीतिक रणनीति का भी संकेत देता है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए आने वाला बजट भी इसी कारण चर्चा में है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावी माहौल को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार इस बार विकास और कल्याण योजनाओं का बड़ा खाका पेश कर सकती है।
संभावना है कि इस बार राज्य का बजट आकार करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के आसपास रखा जाए। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा सकता है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह बजट अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे आगामी चुनावों से पहले सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का अवसर माना जा रहा है।
प्रदेश सरकार 9 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित करने जा रही है। इसी सत्र में धामी सरकार अपना पांचवां बजट पेश करेगी।
गैरसैंण में बजट सत्र आयोजित करना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य गठन के बाद से गैरसैंण को पहाड़ की आकांक्षाओं और क्षेत्रीय संतुलन के प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में यहां से बजट पेश करना सरकार के उस संदेश को भी मजबूत करता है कि विकास केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों तक भी पहुंचेगा।
वर्ष 2022 में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद धामी सरकार लगातार विकास के एजेंडे पर काम करने का दावा करती रही है। सरकार का कहना है कि पिछले चार वर्षों में बुनियादी ढांचे, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में राज्य में मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्यम (MSME) क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लगभग 19,596 नई एमएसएमई इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनमें करीब 2296 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश हुआ है। इसके अलावा 21 बड़े उद्योगों ने भी राज्य में निवेश किया है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की बात कही जा रही है।
सरकार इस बार बजट में ज्ञान ( जी वाई ए एन) मॉडल को प्राथमिकता दे सकती है। इसका अर्थ है गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के विकास को केंद्र में रखना। यह मॉडल सरकार की सामाजिक और आर्थिक योजनाओं की दिशा तय कर सकता है। गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का दायरा बढ़ाने और गरीब परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं में विस्तार की संभावना है। युवाओं के लिए स्टार्टअप, कौशल विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
अन्नदाताओं के लिए कृषि अवसंरचना, सिंचाई और कृषि विपणन सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है। महिलाओं के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देने की योजना बन सकती है।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरकार इसे विकास का प्रमुख आधार बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार के प्रमुख ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा कारीडोर, शारदा कारीडोर व मानसखंड मंदिर माला परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद है कि नए बजट में इन योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।
शहरी और ग्रामीण ढांचे पर बड़ा निवेश
सरकार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार शहरी विकास के लिए लगभग 1500 करोड़ रुपये की आवश्यकता व्यक्त की गई है। इससे अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, नगरीय निकायों की स्थिति में सुधार जैसे कार्य किए जा सकते हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने की योजना भी बजट में शामिल हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषको का मानना है कि यह बजट केवल विकास योजनाओं का दस्तावेज नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। चुनावी वर्ष में सरकार आमतौर पर ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़े। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार, शहरी और ग्रामीण विकास पर जोर तथा पर्यटन परियोजनाओं को गति देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। सरकार विकास और निवेश के आंकड़ों को सामने रखकर यह संदेश देना चाहती है कि पिछले चार वर्षों में राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। वहीं विपक्ष इन दावों की जमीनी सच्चाई पर सवाल उठाने की तैयारी में है।
उत्तराखंड का आगामी बजट कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह केवल राज्य की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह सरकार के विकास एजेंडे और राजनीतिक रणनीति दोनों को भी सामने लाएगा। अब सबकी नजरें गैरसैंण में होने वाले बजट सत्र पर टिकी हैं, जहां से यह तय होगा कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड का विकास मॉडल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।”
