ऋषिकेश,20,02,2026
ऋषिकेश(आरएनएस)। प्रसव के दौरान असहनीय दर्द से गर्भवती महिलाओं को राहत मिलेगी। इसके लिए हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने लेबर एनाल्जीसिया (प्रसव के दौरान दर्द निवारण) सेवा शुरू कर दी है। यह कदम आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। जौलीग्रांट स्थित हिम्स के एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. शीतल ने विभागाध्यक्ष डॉ. गुरजीत कौर के नेतृत्व में इस अत्याधुनिक सेवा का शुभारंभ किया गया। सेवा प्रारंभ होते ही तीन गर्भवती महिलाओं को लेबर एनाल्जीसिया प्रदान किया गया। तीनों का प्रसव सुरक्षित और सफल रहा तथा वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉ. गुरजीत कौर ने बताया कि लेबर एनाल्जीसिया एक वैज्ञानिक और चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित पद्धति है, जिसके माध्यम से प्रसव के दौरान होने वाले तीव्र दर्द को नियंत्रित किया जाता है। विशेषज्ञों की निगरानी में यह तकनीक मां और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। कहा कि लेबर एनाल्जीसिया महिलाओं को यह अधिकार और विकल्प देता है कि वे अपनी सुविधा और इच्छा के अनुसार कम दर्द वाला प्रसव चुन सकें। अस्पताल सेवाएं के निदेशक डॉ. हेमचंद्रा ने कहा कि इस सेवा की सफल शुरुआत के साथ हिम्स जौलीग्रांट ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित की है। यह पहल सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है और भविष्य में अनेक माताओं के लिए राहत और विश्वास का आधार बनेगी। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते। लेबर एनाल्जीसिया को लेकर गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इससे किसी प्रकार के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) हो सकते हैं। अस्पताल सेवाएं के निदेशक डॉ. हेमचंद्रा ने कहा कि इस सेवा की सफल शुरुआत के साथ हिम्स जौलीग्रांट ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित की है। यह पहल सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है और भविष्य में अनेक माताओं के लिए राहत और विश्वास का आधार बनेगी। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते। लेबर एनाल्जीसिया को लेकर गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इससे किसी प्रकार के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) हो सकते हैं।
